मध्य प्रदेश के उन रिटायर कर्मचारियों और अधिकारियों से सरकार अब पेंशन से वसूली करेगी जिन्होंने विसंगतिपूर्ण वेतनमान के बाद सरकार से अधिक राशि ले ली और रिटायर होने के पहले सरकार को अंडरटेकिंग दी है कि वे राशि लौटा देंगे। रिटायर होने के बाद अब इन कर्मचारी-अधिकारियों द्वारा राशि वापस नहीं की गई है और कोर्ट की शरण ली जा रही है। वित्त विभाग ने इस मामले में सख्ती के निर्देश देते हुए कहा है कि अगर कर्मचारी अधिकारी ने अंडरटेकिंग दे दी है तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर उससे सरकार वसूली कर सकती है, भले ही वह रिटायर हो चुका है। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने संचालक पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा मध्यप्रदेश भोपाल तथा सभी संभागीय और जिला पेंशन अधिकारी को दिए निर्देश में कहा है कि राज्य शासन के शासकीय सेवकों के विसंगतिपूर्ण वेतन निर्धारण के चलते होने वाले अधिक भुगतान की वसूली के संबंध सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन किया जाए। इसको लेकर प्रदेश के वित्त विभाग समय-समय पर दिशा-निर्देश पूर्व में भी जारी किये गये हैं। 6 साल पुराने आदेश पर एक्शन लेंगे अफसर एसीएस रस्तोगी द्वारा जारी निर्देश में कहा है कि उच्च न्यायालय के आदेश से यह स्पष्ट होता है कि कुछ संभागीय एवं जिला पेंशन अधिकारियों द्वारा सेवानिवृत शासकीय कर्मचारियों को हुये अधिक भुगतान की वसूली के संबंध में वित्त विभाग द्वारा जारी सर्वोच्च न्यायालय के सिविल अपील 3500/2006 (उच्च न्यायालय पंजाब एवं हरियाणा विरुद्ध जगदेव सिंह) में पारित पर संज्ञान नहीं लिया है। वित्त विभाग ने इस मामले में 12 जून 2020 को निर्देश जारी किए थे, इसलिए एसीएस रस्तोगी ने अब संबंधित अफसरों को करीब 6 साल पहले जारी आदेश के आधार पर रिटायर हो चुके कर्मचारियों, अधिकारियों से उस स्थिति में वसूली करने के निर्देश दिए हैं जिसमें संबंधित अधिकारी कर्मचारी ने अधिक वेतन लाभ लेने पर राशि वापसी की लिखित बात कही है। अनावश्यक मुकदमेबाजी रुकेगी, अफसरों को इसका भी दिया हवाला अपर मुख्य सचिव वित्त रस्तोगी ने कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए कहा है कि कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि मध्य प्रदेश में सभी जिला पेंशन अधिकारियों को रफीक मसीह मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के साथ-साथ जगदीश प्रसाद के मामले में कोर्ट के निर्णयों से अवगत कराया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा है कि प्रतिवादी कर्मचारी, अधिकारी और राज्य के वकील से अनुरोध है कि वे इस आदेश को मुख्य सचिव को सूचित करें, जो प्रदेश के सभी जिला पेंशन अधिकारियों तक निर्देश पहुंचाने के लिए कदम उठाएंगे, ताकि भविष्य में अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचा जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के आधार पर की थी टिप्पणी सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2016 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय विरुद्ध जगदेव सिंह (सिविल अपील 3500/2006) मामले में फैसला सुनाया था कि यदि किसी कर्मचारी ने अतिरिक्त भुगतान को वापस करने का वचन (Undertaking) दिया है, तो रिटायरमेंट के बाद भी उससे रिकवरी वैध है। कोर्ट ने कहा कि वचनबद्धता होने पर रफीक मसीह मामले के नियम (रिटायर्ड कर्मचारी से रिकवरी नहीं) लागू नहीं होते। दरअसल, जिस केस में यह फैसला हुआ है, इस मामले में प्रतिवादी जगदेव सिंह को संशोधित वेतनमान का विकल्प चुनते समय एक वचन पत्र (Undertaking) देना था कि यदि भविष्य में कोई अधिक भुगतान पाया जाता है, तो उसे सरकार को लौटा दिया जाएगा। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के उस निर्णय को खारिज कर दिया, जिसने रिकवरी पर रोक लगा दी गई थी। सर्वोच्च अदालत ने माना कि चूंकि कर्मचारी ने स्वयं अधिक भुगतान लौटाने का वचन दिया था, इसलिए वह इसके लिए बाध्य है। इस मामले में कोर्ट ने निर्देश दिया कि अतिरिक्त भुगतान की वसूली की जाए, लेकिन यह वसूली दो वर्ष की अवधि में समान मासिक किश्तों में की जानी चाहिए। इस फैसले के बाद अब एमपी में भी सरकार ने यह तय किया है कि अगर अतिरिक्त राशि पाने वाले कर्मचारी ने लिखित वचन दिया है, तो राज्य सरकार उस राशि की वसूली कर सकती है। जिसने अंडरटेकिंग नहीं दी, उससे नहीं होगी रिकवरी अपर मुख्य सचिव वित्त रस्तोगी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी अधिकारी कर्मचारी ने अंडरटेकिंग नहीं दी है तो उसे वसूली के लिए परेशान नहीं करना है। यह निर्देश भी कोर्ट ने दिए हैं। इसलिए ऐसे लोगों से ही रिकवरी की जाएगी जिन्होंने वसूली के लिए अंडरटेकिंग दी है। रस्तोगी के अनुसार इससे कोर्ट में लगने वाले अनावश्यक मुकदमों की संख्या घटेगी।
ज्यादा वेतन लेकर लौटाने की अंडरटेकिंग दी तो होगी रिकवरी:मध्य प्रदेश के रिटायर कर्मचारियों से वसूली के लिए वित्त विभाग ने जारी किए निर्देश
