धर्मपाल ने बताया कि उनके पिता परमानन्द धीमान ने भारत पाकिस्तान का विभाजन के बाद साल 1948 में देहरादून में आकर बसे और उन्होंने एक छोटी सी दुकान शुरू की थी जिनकी मिठाइयों और समोसों का टेस्ट लोगों को पसंद आया था. उन्होंने बताया कि उस समय पूरे देहरादून में 10 से 15 ही मिठाई की दुकानें ही हुआ करती थीं और उनके पिता हलवाइयों के यूनियन के अध्यक्ष थे.
1948 में खोले समोसे की दुकान, लोगों को पसंद आया स्वाद, आज चल रहीं 15 बड़ी दुकाने
