होलिका की धधकती आग, 25 फीट से ज्यादा ऊंची लपटें और उसमें से निकलता संजू पंडा। ये नजारा था मथुरा के फालैन गांव की होलिका का। ये परंपरा करीब 5300 साल पुरानी है। एक ही पंडा परिवार इसको निभाता आ रहा है। दरअसल, इसकी शुरुआत वसंत पंचमी से होती है। संजू पंडा अपने घर को छोड़कर प्रह्लाद मंदिर में रहना शुरू कर देते हैं। मंदिर के गर्भगृह में वो 45 दिनों तक कड़े व्रत और तपस्या में रहते हैं। संजू ने होलिका की रात निर्धारित लग्न में दीपक जलाया और फिर जप शुरू किया। फिर होलिका में आग जलाई गई। संजू ने सुबह 4 बजे प्रह्लाद कुंड में स्नान किया। इसके बाद संजू दौड़ते हुए आए और जलती होली से निकल गए। VIDEO में देखिए संजू की श्रद्धा…
मथुरा में 25 फीट ऊंची लपटों से कैसे निकला पंडा:शरीर बिल्कुल झुलसा नहीं; विदेशी देखकर हैरान; VIDEO में देखिए पूरी कहानी
