मटका-फ्रीजर नहीं, लकड़ी से बने इस पहाड़ी बर्तन में जमता था हलवाई जैसा गाढ़ा-मलाईदार दही, अब विलुप्ति की कगार पर

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Uttarakhand Traditional Utensil: उत्तराखंड की पहाड़ी रसोई की रूह कही जाने वाली ‘ठेकी’ आज आधुनिकता के चकाचौंध में अपनी पहचान खोती जा रही है. सानन और गेठी की लकड़ी से हस्तशिल्प के जरिए तैयार होने वाली यह ठेकी न केवल दही जमाने का एक पारंपरिक बर्तन थी, बल्कि यह पहाड़ की सेहत, सादगी और शुद्ध स्वाद का सबसे बड़ा राज भी थी. बुजुर्गों के अनुसार, लकड़ी की ठेकी में जमे दही की वह भीनी खुशबू और गाढ़ापन आज के स्टील या प्लास्टिक के बर्तनों में नामुमकिन है.