बरसाना के श्रीजी मंदिर में होली के गीत गूंज रहे हैं। छत पर गोस्वामी समाज के युवक बड़ी-बड़ी कढ़ाईयों में टेसू के फूलों का रंग तैयार कर रहे हैं। ये 25 फरवरी को होने वाली लट्ठमार होली की तैयारी है। जब नंदगांव के हुरियारे श्रीजी मंदिर में होली खेलने से पहले अनुमति लेने पहुंचते हैं। वो कहते हैं- राधाजी…आप हमें अनुमति दीजिए, ताकि हम कान्हा के ग्वाल आपकी सखियों के साथ होली खेल सकें। चांदी की पिचकारी से राधाजी पर रंग डालकर त्योहार की शुरुआत करते हैं। इसके बाद शुरू होती है विश्व विख्यात ब्रज की होली। इसको देखने के लिए 7 दिन में 15 लाख टूरिस्ट मथुरा-वृंदावन पहुंचेंगे। हुरियारों पर डालने के लिए टेसू के फूलों से ही रंग क्यों तैयार हो रहे हैं? इसको तैयार करने का खास तरीका क्या है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ऐप टीम बरसाना के ब्रह्मांचल पर्वत पर बने श्रीजी मंदिर पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट…
रंग तैयार करते गोस्वामी युवक गा रहे ब्रज के गीत कढ़ाही में गरम करके चटक रंग बनाते हैं…
श्रीजी मंदिर की छत की सीढ़ियों को चढ़ते हुए हमारे कानों में वो गीत सुनाई देने लगे, जिन्हें गोस्वामी युवक गाते हुए झूम रहे थे। ये होली के गीत कुछ ऐसे थे- वृंदावन बानिक बनो, भंवर करे गुंजार दुल्हन प्यारी राधिका, तूने नंदकुमार बजाए रहियो रहे…बंसिया छोटो सा कन्हैया, जिनके बड़े-बड़े नैन बरसाने की कुंज गलियों में ठाड़े हमारे सैन खास रंगों को तैयार कैसे करते हैं? इसको समझने के लिए हमनें तैयारियों को देखा। नीले रंग के बड़े-बड़े ड्रम में टेसू के फूल भिग रहे थे। वहीं, चूल्हे पर बड़ी कढ़ाई में टेसू के फूलों को पानी में मिलाकर गर्म किया जा रहा है, इससे यह चटक रंग दे सकें। गोस्वामी युवक कढ़ाई में तैयार कर रहे रंग को लगातार लकड़ी की मदद से चलाते रहते हैं, ताकि फूल पूरा रंग छोड़ दें। इसके बाद इन्हें छान लिया जाता है। 3 स्टेट से आते हैं 1 हजार क्विंटल टेसू के फूल
यहां गोस्वामी राकेश ब्रजवासी कहते हैं- प्राकृतिक रंगों को केवड़ा, टेसू के फूल, चंदन, इत्र और गुलाब के फूलों से तैयार होता है। इसकी शुरुआत 1 महीने पहले करते हैं। करीब 1 हजार क्विंटल फूल मध्यप्रदेश, राजस्थान और हरियाणा से मंगवाए जाते हैं। पहले उन्हें पानी में भिगने दिया जाता है। फिर उन्हें कढ़ाही में गरम किया जाता है। गरम होने के बाद सफेदी डाली जाती है, जब ये रंग छोड़ देते हैं, फिर हम इन्हें छान लेते हैं। इसी रंग का इस्तेमाल सभी ग्वाले करते हैं। अब बात उन लड्डुओं की, जो श्रीजी मंदिर से फेंके जाएंगे
बरसाना में लट्ठमार होली से एक दिन पहले लड्डू होली खेली जाती है। ये होली 24 फरवरी को है, इसमें प्रसाद स्वरूप लड्डू लुटाए जाते हैं। एक-दूसरे पर लड्डू लुटाने से इसका नाम लड्डू होली पड़ गया। सिर्फ इस होली को देखने और इसमें शामिल होने के लिए 8 से 10 लाख टूरिस्ट मथुरा-वृंदावन पहुंच रहे हैं। इस बार 10 हजार किलोग्राम लड्डू होली के दौरान लुटाए जाने की तैयारी है। बूंदी के ये लड्डू कैसे तैयार होते हैं, इसको समझने के लिए हम बरसाना के मुख्य बाजार पहुंचे। हमारी सबसे पहले मुलाकात हलवाई रामबाबू से हुई। वह कहते हैं- ये राधाजी का काम है, इसका हम प्रचार नहीं करवा सकते, इसलिए कैमरे पर बात नहीं करेंगे। हमने कहा- ठीक है…आप ये बता दो कि इन्हें तैयार कैसे करते हैं। खुद से तैयार करते हैं बेसन, ताकि क्वालिटी बनी रहे
हलवाई रामबाबू कहते हैं- लड्डू में सबसे अहम बेसन की क्वालिटी होती है, लड्डू के लिए बेसन हम लोग खुद ही तैयार करवाते हैं। फिर सही अनुपात में उसका घोल तैयार करते हैं। गर्म घी में छलनी के जरिए बूंदी बनाकर छाना जाता है। इसको 10 से 15 मिनट तक सेंकते हैं। फिर बूंदी को शक्कर के घोल (चाशनी) में डाल दिया जाता है। 30 मिनट तक रखने के बाद मीठी हो चुकी बूंदी को निकालकर इसके लड्डू तैयार किए जाते हैं। राधाजी के चरणों तक लड्डू पहुंचे, इतना काफी
उन्होंने बताया कि हमारी तरह करीब 18 दुकानों पर 10 हजार किलोग्राम लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। ये सब होली से पहले श्रीजी मंदिर पहुंच जाएंगे। इन लड्डुओं की कीमत कैसे तय होती है? ये पूछने पर उन्होंने कहा- मैंने पहले ही कहा कि ये राधाजी का काम है, इसमें हम मुनाफा नहीं देखते। सिर्फ उनके चरणों तक लड्डू पहुंच जाए, इतना काफी है। लड्डू होली की मान्यता पढ़िए… ब्रज के लोग लड्डू होली के पीछे की कहानी सुनाते हैं- द्वापर युग में राधारानी की सखियां भगवान श्रीकृष्ण को होली खेलने का निमंत्रण देने नंदगांव गई। राधाजी का संदेश सुनने के बाद श्रीकृष्ण और उनके सखाओं ने कहा- हम बरसाना में होली खेलने कल आएंगे। सखियों ने लौटकर ये बात बरसाना में बताई। बरसाना के लोग खुश होकर एक-दूसरे पर रंग उड़ाते हुए लड्डू फेंकने लगे। उस वक्त से ही लड्डू होली की शुरुआत हो गई। (आज भी ये परंपरा जारी है। नंदगांव से होली का संदेश बरसाना पहुंचने के बाद लड्डू होली खेली जाती है।) बांके बिहारी मंदिर की होली गोस्वामी बोले- 4 दिन अद्भुत रंग से सराबोर होंगे भक्त
अब हम वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर पहुंचे। यहां मालूम हुआ कि कश्मीरी केसर, कन्नौज के इत्र, कर्नाटक के चंदन और हाथरस के गुलाल को भक्तों पर बतौर प्रसाद उड़ाया जाएगा। मंदिर के पुजारी और सेवायत परिवार होली के रसिया गीत गाते हुए इन रंगों को तैयार कर रहे हैं। बांके बिहारी मंदिर में गोपी गोस्वामी कहते हैं- मंदिर में 4 दिन तक ये अद्भुत रंग भक्तों पर लुटाया जाएगा। पूरे विश्व से लोग इस रंग को प्रसाद की तरह खेलने आते हैं। इसकी तैयारी हम कई हफ्ते पहले से शुरू करते हैं। टेसू के फूलों के रंग और इक्रो फ्रेंडली सुंगधित गुलाल पूरे वातावरण को अद्भुत बना देता है। होली कक्ष की स्पेशल भट्ठी पर उबाले जा रहे फूल
बांके बिहारी मंदिर के सेवायत आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी कहते हैं- बिहारीजी मंदिर में रंगोत्सव 27 फरवरी की रंगभरी एकादशी से शुरू हो जाएगा, जो 2 मार्च की चतुर्दशी की रात तक लगातार चलेगा। इस रसीले महोत्सव में ठाकुरजी रंग-गुलाल से होली खेलते हुए अद्भुत आनंद उठाएंगे। उत्सव में भक्तों पर टेसू के फूलों से बना रंग डाला जाएगा। मंदिर के परिक्रमा मार्ग स्थित प्राचीन होली कक्ष में इसके लिए स्पेशल भट्ठी बनाई गई है। यहां लोहे की बड़ी-बड़ी कढ़ाहियों में टेसू के फूल को उबालकर गुनगुना रंग तैयार किया जा रहा है। ये रंग भक्तों पर पड़ने के बाद माना जाता है कि स्किन से संबंधित रोग ठीक हो जाते हैं। धुलहेड़ी पर कान्हा खाएंगे चाट, जलेबी
प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया- 3 मार्च को मंदिर में डोलोत्सव (धुलैडी पर्व) मनाया जाएगा। उस दिन भगवान खुद होली नहीं खेलेंगे, सिर्फ भक्तों को धुलैड़ी (रंग खेलना) मनाते हुए निहारेंगे। 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण इस बार डोलोत्सव के दर्शन सीमित समय तक ही होंगे। होली महोत्सव के बीच ठाकुरजी को चाट, जलेबी और पकवानों का खास भोग लगाया जाएगा। सेवायत के मुताबिक, भोग की चाट में दही बड़ा, दही पकौड़ी, सोंठबड़ा, सोंठ पकौड़ी, आटा- सूजी की टिकिया, पानी पूरी, समोसा, पकोड़े, गुजिया, पापड़ी, खाजा, लठोर व्यंजन शामिल होते हैं। इस मौके पर काजू, बादाम, पिस्ता, अखरोट, पोस्त, खरबूजा के बीज, किसमिस, मुनक्का, गुलकंद, दूध-मलाई युक्त ठंडाई और आलू एवं मैदा की स्वादिष्ट जलेबियां भी ठाकुरजी को अर्पित की जाएंगी। आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी बताते हैं- पर्व के दौरान बांके बिहारी जगमोहन में चांदी सिंहासन पर विराजमान होकर दर्शन देंगे। इस बार दो से तीन हजार किलोग्राम गुलाल और करीब 25 हजार लीटर पानी में बना टेसू के फूलों के रंग की भक्तों पर बौछार की जाएगी चंद्रग्रहण से दर्शन की बदली टाइमिंग भी जानिए
3 मार्च को पड़ने वाले चंद्रग्रहण के चलते भगवान बांके बिहारी के दर्शन की टाइमिंग बदल दी गई है। उस दिन मंदिर में श्रद्धालुओं को सुबह 6:15 बजे से ठाकुरजी के दर्शन होंगे। सेवायत 5:15 बजे में मंदिर में प्रवेश करेंगे और सुबह 6:25 बजे श्रृंगार आरती होगी। फिर 6:30 बजे राजभोग सेवा प्रारंभ होगी। राजभोग आरती 8:30 बजे होगी और 9 बजे मंदिर के पट बंद हो जाएंगे। सेवायत 9 बजे बाहर आ जाएंगे। फिर शाम 7 बजे से मंदिर खुलेगा और रात 10 बजे तक दर्शन हो सकेंगे।
——————— ये पढ़े – बरसाना की महिलाएं लाठियों में तेल लगा रहीं: हुरियारे बनवा रहे ढाल; मथुरा में लट्ठमार होली की तैयारी देखिए नंदगांव और बरसाना लट्ठमार होली के लिए तैयार है। नंदगांव यानी जहां श्रीकृष्ण ने अपना बचपन बिताया। प्रभु के सखा स्वरूप में ग्वाले 8 Km दूर बरसाना पहुंचेंगे। बरसाना यानी जहां राधाजी रहती थीं। यहां राधा रानी की सखियों के स्वरूप में हुरियारने उन पर लाठियां बरसाएंगी। 25 फरवरी की दोपहर 12 बजे नंदगांव के हुरियारे बरसाना के पीली पोखर पहुंचेंगे। यहां पगड़ी बांधेंगे, श्रृंगार के बाद वह लाडलीजी के दर्शन करेंगे। इसके बाद करीब 3km के दायरे में फैली कुंज गलियों से वह गुजरेंगे। पढ़िए पूरी खबर…
नंदगांव के हुरियारों के लिए बरसाना में रंग बन रहा:राधा की सखियां करेंगी बौछार; श्रीजी मंदिर से क्यों फेंके जाते हैं लड्डू, ये जानिए
