प्रयागराज माघ मेला छोड़ने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों काशी में हैं। यहां सोमवार को शंकराचार्य एक बार फिर खुलकर बोले। उन्होंने कहा- योगी खलीफा जैसे हैं। वह सीएम की कुर्सी छोड़ दें या फिर महंत का पद। योगी को असली हिंदू साबित करने के लिए मैंने 40 दिन दिए थे। 10 दिन बीत गए, अब उनके पास 30 दिन बचे हैं। दैनिक भास्कर ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से खास बात की। पूरी बातचीत पढ़िए … भास्कर: कहा जा रहा कि यह शंकराचार्य का राजनीतिक स्टैंड है? अविमुक्तेश्वरानंद: इसमें हम क्या कहें? यह तो आप जो चाहो, आरोप लगा दो। हमको जो करना है, वह कर रहे। हम अपने धर्म के अनुसार काम कर रहे हैं। हम पार्टी के अनुसार नहीं चलते। हम किसी पार्टी के सदस्य नहीं। किसी पार्टी के विरोधी भी नहीं हैं। इसलिए हम क्यों पार्टी के अनुसार काम करेंगे? हमने मुख्यमंत्री को नकली हिंदू नहीं बताया, सवाल उठाया है। उनके असली हिंदू होने पर प्रश्नचिह्न है, वही हमने दर्शाया है। अभी हमने निर्णय नहीं किया है। अभी हमने केवल पिछले 10 दिनों की समीक्षा की है। उसके आधार पर यह पाया कि अभी असली हिंदू सिद्ध होने में वो सतर्क दिखाई नहीं दे रहे।
भास्कर: मुख्यमंत्री को मिलने वाले वेतन और खर्चों पर भी आपने सवाल उठाए? अविमुक्तेश्वरानंद: हां, हमारे यहां शास्त्र में नियम है कि जो वैरागी, संन्यासी, साधु, यति हो जाता है, वो सैलरी-पेड नहीं हो सकता। उनके पंथ का जो सिद्ध सिद्धांत पद्धति नाम का ग्रंथ है, जो गुरु गोरखनाथ जी ने लिखा है, उसमें जो भृतक कर्म है। उसको निंदित कहा गया है और कहा है कि ये विष (जहर) है। इसको योगी को स्वीकार नहीं करना चाहिए। तो क्या उनको सनातन धर्म के मानकों पर नहीं चलना चाहिए? क्या उनसे सनातन धर्म के आचार्य जवाब नहीं मांग सकते? हमने मांगा है। अपराध कर दिया हो, तो आप मुकदमा दायर करिए। भास्कर: आपने सीएम को 40 दिन का समय दिया था। 30 दिन बचे हैं?
अविमुक्तेश्वरानंद: हमारी कोई रणनीति नहीं। हम तो अपने विषय को जनता के बीच में ले जाना चाहते हैं। आज हमने उसके लिए दो विषय रखे हैं। पहला- वेतन विरुद्ध वैराग्य का वैरागी कैसे वेतन भोगी हो सकता है? दूसरा- गेरुआ विरुद्ध गुलाबी। यानी गेरुआ कपड़ा पहनकर क्या कोई गुलाबी मांस का व्यापारी हो सकता है? पक्ष-विपक्ष दोनों को हमने आमंत्रित किया है। आइए पक्ष में हैं तो पक्ष में, विपक्ष में हैं तो विपक्ष में अपनी बात कहिए। भास्कर: अभी बहुत सारे संतों, मठ-मंदिरों से आपका संपर्क हो रहा होगा? अविमुक्तेश्वरानंद: देखिए समर्थन की बात, राजनीति की बात है। बिल्कुल एक बार बहुत ठंडे दिमाग से समझ लीजिए आप लोग। जिंदगी भर के लिए समझ लीजिए। यह जो समर्थन, समर्थन वापसी, यह राजनीतिक मामला है। हमारे यहां समर्थन का कोई मतलब नहीं। 50 लाख लोग एक तरफ खड़े हो जाओ, 100 करोड़ लोग एक तरफ खड़े हो जाओ। तुम्हारी बात शास्त्रानुकूल होगी तो ही ग्राह्य होगी। एक व्यक्ति खड़ा होकर अकेला शास्त्र सम्मत बात कहेगा और 100 करोड़ लोग खड़े होकर उससे विरुद्ध कहेंगे। तो भी 100 करोड़ की बात नहीं मानी जाएगी। भास्कर: आपने मुख्यमंत्री को खलीफा क्यों कहा? अविमुक्तेश्वरानंद: जो व्यक्ति मुसलमानों में राजा होता और धर्मगुरु भी होता है, उसका नाम खलीफा होता है। ये खलीफा पद्धति मुसलमानों में है। हमारे हिंदुओं में ये पद्धति नहीं है। हमारे यहां राजा अलग होता है, गुरु अलग होता है। तो हिंदुओं में ये क्यों किया जा रहा कि जो राजा होगा वही गुरु भी होगा? इसका मतलब है, हिंदुओं का मुसलमानी शैली को प्रवेश कराया जा रहा है। यह अस्वीकार्य है। हम कुछ नहीं कह रहे, हम आपको बता रहे हैं कि देखिए वो एक मठ के महंत हैं, गद्दीनशीन हैं और मुख्यमंत्री हैं। महंती कहती है, संतत्व कहता है, गेरुआ कपड़ा कहता है कि एक भी प्राणी का वध मत करो। ठीक है? और मुख्यमंत्री का पद कहता है कि करोड़ों मार कर बेच लो, रेवेन्यू बढ़ना चाहिए, अपना राजस्व बढ़ना चाहिए। दोनों एक साथ तो नहीं हो सकता न? या तो महंती गद्दी की अवहेलना उनको करनी पड़ेगी या मुख्यमंत्री पद की। ऐसे में दो लोग होंगे, तो निभ जाएगा। अब वो दोनों एक होकर के जो निभाना चाहते हैं, उसी के लिए तो उनके ऊपर सवाल उठ रहे। इसलिए उनको एक करवट बैठना पड़ेगा, दोनों नहीं चलेगा। यही हमारा कहना है। या तो महंत गद्दी छोड़ें, केवल मुख्यमंत्री रहें। सादा कपड़ा पहनें या तो फिर वो महंत रहें, मुख्यमंत्री की गद्दी छोड़ें। दोनों गद्दियां एक साथ नहीं चल सकतीं। यह हिंदू धर्म की परंपरा नहीं है। अब पढ़िए प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य की 6 बड़ी बातें माघ मेले के दौरान पुलिस ने शंकराचार्य की पालकी रोकी थी अब अविमुक्तेश्वरानंद के बारे में जानिए ज्योतिष्पीठ का पूरा विवाद जानिए ——————– ये खबर भी पढ़ें… किन्नर महामंडलेश्वर को भाजपा का अध्यक्ष क्यों नहीं बना देते, शंकराचार्य महाकुंभ में हिमांगी सखी की मौजूदगी पर नाराज
किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी को महामंडलेश्वर की उपाधि पर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा- भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रपति का पद खाली होने वाला है। वहां क्यों नहीं बैठा देते? पढ़ें पूरी खबर…
अविमुक्तेश्वरानंद बोले-योगी मुख्यमंत्री या महंत में से एक पद छोड़ें:सीएम खलीफा जैसे, भगवा पहनने वाला मीट का व्यापार नहीं कर सकता
