हरियाणा में ऑपरेशन पीछा करो से पकड़े 30 भ्रष्टाचारी:स्कॉलरशिप घोटाले में शामिल; बिना ड्यूटी के वॉलंटियर के नाम पैसे निकालने

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हरियाणा में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन पीछा करो’ के अंतर्गत राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 24 घंटे की कार्रवाई के साथ इस अभियान के तहत अब तक कुल 30 फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ये सभी आरोपी विभिन्न भ्रष्टाचार, सरकारी धन के गबन, रिश्वतखोरी एवं वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे थे। यह अभियान उन व्यक्तियों के विरुद्ध केंद्रित है, जो भ्रष्टाचार के मामलों में नामजद होने के बावजूद जांच और कानून से बचते रहे थे। सतर्कता ब्यूरो द्वारा खुफिया सूचना, तकनीकी विश्लेषण और निरंतर निगरानी के आधार पर ऐसे आरोपियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जा रहा है। स्कॉलरशिप घोटालेबाज दबोचे गए ‘ऑपरेशन पीछा करो’ के अंतर्गत पकड़े गए आरोपियों में ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जो सरकारी विभागों में पदस्थ रहते हुए अथवा निजी व्यक्तियों के रूप में सरकारी योजनाओं और धन का दुरुपयोग करने में संलिप्त पाए गए। इनमें छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े आरोपी शामिल हैं। जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों, जाली दाखिलों और बैंक खातों के माध्यम से लाखों रुपए की छात्रवृत्ति राशि का गबन किया। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी पते, फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी उपस्थिति दर्शाकर सरकारी धन को निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया। बिना ड्यूटी के वॉलंटियर के नाम पैसे निकाले इसी प्रकार, गृह रक्षी एवं नागरिक सुरक्षा विभाग से जुड़े एक प्रकरण में यह उजागर हुआ कि बिना वास्तविक ड्यूटी कराए स्वयंसेवकों के नाम पर वेतन, मानदेय दिखाकर राशि निकलवाई गई। बाद में उसे आपस में बांट लिया गया। गहन एवं तथ्यात्मक जांच में कुल 8 लाख 88 हजार 332 रुपए की सरकारी राशि के गबन की पुष्टि हुई है। जांच के अनुसार कंवर पाल (तत्कालीन सेंटर कमांडर) द्वारा 2 लाख 16 हजार 620 रुपए, तरसेम लाल (तत्कालीन कम्पनी कमांडर) द्वारा 3 लाख 2 हजार 574 , चंदन कुमार (कम्प्यूटर ऑपरेटर/स्वयंसेवक) द्वारा 1 लाख 44 हजार 36 रुपए और कृष्ण राणा (हवलदार) द्वारा 2 लाख 25 हजार 102 रुपए की राशि का दुरुपयोग किया जाना प्रमाणित पाया गया है। रिश्वतखोरी के मामलों में भी कार्रवाई अभियान के तहत भूमि से जुड़े कार्यों में रिश्वत मांगने के मामलों में भी फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि कुछ मामलों में राजस्व कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए निजी व्यक्तियों के माध्यम से रिश्वत की राशि तय करवाई गई और किश्तों में धन वसूला गया। ऐसे मामलों में बिचौलियों की भूमिका उजागर होने के बाद उन्हें भी आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया है। लंबे समय से फरार चल रहे थे फरार गिरफ्तार किए गए कई आरोपी लंबे समय से स्थान बदलकर गिरफ्तारी से बच रहे थे। सतर्कता ब्यूरो की टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजी विश्लेषण तथा स्थानीय सत्यापन के आधार पर उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए सुनियोजित तरीके से कार्रवाई की। इससे न केवल पुराने लंबित मामलों को गति मिली है, बल्कि भ्रष्टाचार से जुड़े नेटवर्क को भी तोड़ने में मदद मिली है।