श्रीसंकटमोचन हनुमान किला मंदिर के महंत परशुराम दास ने बताया पूर्वाचार्य श्रीमहंत रामविलास दास महाराज सेवा भाव के सच्चे प्रतीक थे। वे बाईपास स्थित अपने आश्रम में संतों, असहायों एवं जरूरतमंदों की सेवा में सदैव तत्पर रहते रहे। उन्होंने सेवा को ही परम धर्म माना और अपने शिष्यों, भक्तों को निस्वार्थ सेवा का संदेश देते रहे। परमात्मा की प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग परमार्थ व निस्वार्थ सेवा है। यही उपदेश वे जीवनभर देते रहे। महाराजश्री भजन में तल्लीन रहते थे। जो भी गरीब, असहाय या भूला-भटका व्यक्ति उनके आश्रम में पहुंचता था। उसकी सेवा वे पूरी निष्ठा से करते थे।
पुण्यतिथि पर रामनगरी के हजारों संत-महंतों ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर खाक चौक के श्रीमहंत बृजमोहन दास, मुख्य पुजारी रामचरण दास, निर्वाणी अनी के श्रीमहंत मुरली दास, संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास, बड़े भक्तमाल के महंत अवधेश कुमार दास, महंत जन्मेजय शरण, महंत डॉ. रामानंद दास, महंत बालयाेगी रामदास, महंत इंद्रदेव दास, महंत हेमंत दास, सिद्धबाबा नरसिंह दास, स्वामी छविराम दास, महंत बलराम दास, विनोद सिंह, डॉ. एम.पी. यादव, पार्षद अंकित त्रिपाठी, श्री चंद्र यादव सहित अनेक श्रद्धालु भक्तों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
