डीएसपी (ईओडब्ल्यू ) मंजीत सिंह ने बताया कि आरोपित बीट गार्ड राजेन्द्र से मुआवजा राशि दिलाने के नाम पर चार लाख रुपये की मांग कर रहा था। यह डील 3.5 लाख रुपये हुई। बीट गार्ड राजेन्द्र से पहले ही 50 हजार रुपये ले चुका है। शेष तीन लाख रुपये के लिए वह ग्रामीण के साथ गुरुवार को बैंक पहुंचा था। वह ग्रामीण से उसे खाते में आई मुआवजा राशि से तीन लाख रुपये निकालने का दबाव बना रहा था, तभी ईओडब्ल्यू की टीम ने उसे बैंक के बाहर पकड़ लिया।
उन्होंने बताया कि बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों के बढ़ते हमलों को देखते हुए सोनेवानी, चिखलाबड्डी और नवेगांव का विस्थापन किया जा रहा है। इन तीनों गांवों के ग्रामीणों को 15-15 लाख रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से शासन से मुआवजा राशि दी जा रही है। नवेगांव के राजेन्द्र धुर्वे से बीट गार्ड ने चार लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी, उसके परिवार में पांच सदस्यों को 15-15 लाख के हिसाब से 75 लाख रुपये मिलने हैं। इसमें 20 लाख रुपये राजेन्द्र के बैंक खाते में आ चुके हैं। शेष 55 लाख रुपये की राशि दिलाने के नाम पर बीट गार्ड ग्रामीण से चार लाख रुपये की डिमांड कर रहा था। फिलहाल, ईओडब्ल्यू की टीम लालबर्रा के रेस्टहाउस में आरोपित बीट गार्ड से पूछताछ में जुटी हुई है।
