‘कठमुल्ला’ कहने वाले जज महाभियोग से पहले रिटायर होंगे:राज्यसभा में डेढ़ साल से मामला लटका; इलाहाबाद हाईकोर्ट में कल समारोह

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव बुधवार, 15 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पिछले करीब एक साल से राज्यसभा में लटका पड़ा है। जस्टिस शेखर कुमार यादव 8 दिसंबर, 2024 को प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद के लीगल सेल के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने कहा था- मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं कि यह हिंदुस्तान है और यह देश यहां रहने वाले बहुसंख्यकों की इच्छा से चलेगा। लेकिन, यह जो कठमुल्ला है, यह सही शब्द नहीं है। लेकिन कहने में परहेज नहीं है, क्योंकि वह देश के लिए बुरा है। घातक है, देश के खिलाफ है। जनता को भड़काने वाले लोग हैं। देश आगे न बढ़े, ऐसा सोचने वाले लोग हैं। उनसे सावधान रहने की जरूरत है। जस्टिस शेखर के इस बयान की काफी आलोचना हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस शेखर से स्पष्टीकरण भी मांगा था। उनसे कहा गया था कि आप खेद प्रकट कर दीजिए, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया था और कहा था कि उन्होंने ऐसा कुछ भी गलत नहीं बोला है। अब महाभियोग प्रस्ताव का क्या होगा?
जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव राज्यसभा में 13 दिसंबर 2024 को लाया गया था। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के 55 सांसदों के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर थे, जो आवश्यक 50 सांसदों की संख्या से अधिक है। लेकिन प्रस्ताव पर राज्यसभा के महासचिव की तरफ से अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। इसलिए प्रस्ताव अभी भी राज्यसभा में लंबित है, लेकिन इससे पहले ही जस्टिस यादव रिटायर हो रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद प्रस्ताव खुद ब खुद रद्द हो जाएगा। हाईकोर्ट में विदाई समारोह होगा
जस्टिस यादव के रिटायरमेंट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में फुल कोर्ट रेफरेंस आयोजित किया जाएगा। फुल कोर्ट रेफरेंस बुधवार को चीफ जस्टिस की कोर्ट में दोपहर 3.45 पर रखा गया है। इसमें हाईकोर्ट के सभी जजों के अलावा बार एसोसिएशन के अधिवक्ता सदस्य और हाईकोर्ट रजिस्ट्री के अधिकारी शामिल होंगे। हाईकोर्ट की तरफ से सभी को शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है। जस्टिस यादव ने 12 दिसंबर 2019 को हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 26 मार्च 2021 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया था। अब पढ़िए जस्टिस शेखर ने और क्या-क्या कहा था? उनसे सहिष्णु और दयालु होने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
जस्टिस शेखर कुमार यादव ने कहा था कि हमें सिखाया जाता है कि छोटे से छोटे जानवर को भी नुकसान न पहुंचाएं, चींटियों को भी न मारें। यह सीख हमारे अंदर समाई हुई है। हमारी संस्कृति में बच्चे वैदिक मंत्र और अहिंसा की सीख के साथ बड़े होते हैं। शायद इसीलिए हम सहिष्णु और दयालु हैं। जब दूसरे पीड़ित होते हैं, तो हमें दर्द होता है। लेकिन कुछ अलग संस्कृति में, छोटी उम्र से ही बच्चों को जानवरों के वध के बारे में बताया जाता है। इससे उनके अंदर दया और सहिष्णुता का भाव ही नहीं रहता। आप उनसे सहिष्णु और दयालु होने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? तीन तलाक के अधिकार का दावा नहीं कर सकते
मुस्लिम समुदाय का नाम लिए बगैर जस्टिस शेखर यादव ने कहा था- आप उस महिला का अपमान नहीं कर सकते, जिसे हमारे शास्त्रों और वेदों में देवी की मान्यता दी गई है। आप चार पत्नियां रखने, हलाला करने या तीन तलाक के अधिकार का दावा नहीं कर सकते। अगर आप कहते हैं कि हमारा पर्सनल लॉ इसकी अनुमति देता है, तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। आप कहते हैं, हमें तीन तलाक देने और महिलाओं को भरण-पोषण न देने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार काम नहीं करेगा। वह दिन दूर नहीं, जब देश में UCC लागू होगा
जस्टिस यादव ने कहा था कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) ऐसी चीज नहीं है, जिसका VHP, RSS या हिंदू धर्म समर्थन करता हो। देश की टॉप अदालत भी इसके बारे में बात करती हैं। उन्होंने देश भर में समान नागरिक संहिता की उम्मीद जताते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में वक्त लगा, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब यह साफ हो जाएगा कि अगर एक देश है, तो एक कानून और एक दंडात्मक कानून होना चाहिए। जो लोग धोखा देने या अपना एजेंडा चलाने की कोशिश करते हैं, वे लंबे वक्त तक नहीं टिकेंगे। हिंदू धर्म में थीं तमाम बुराइयां
जस्टिस यादव ने यह भी स्वीकार किया था कि हिंदू धर्म में तमाम कुरीतियां थीं। बाल विवाह और सती प्रथा जैसी बुराइयां थीं, लेकिन राम मोहन राय जैसे सुधारकों ने इन प्रथाओं को खत्म करने के लिए संघर्ष किया। हिंदू अन्य समुदायों से समान संस्कृति और परंपराओं का पालन करने की अपेक्षा नहीं करते हैं। लेकिन उनसे इस देश की संस्कृति, महान हस्तियों और इस भूमि के भगवान का अनादर न करने की अपेक्षा जरूर की जाती है। अब जस्टिस शेखर कुमार यादव के बारे में जानिए… पहले भी विवादित बयान दिए गोरक्षा ‘हिंदुओं का मौलिक अधिकार’ घोषित हो: 1 सितंबर को 2021 को जस्टिस शेखर यादव ने कहा था- वैज्ञानिकों का मानना है कि गाय ही एकमात्र जानवर है जो ऑक्सीजन छोड़ती है। उन्होंने संसद से गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने और गोरक्षा को “हिंदुओं का मौलिक अधिकार” घोषित करने का भी आह्वान किया था। हिंदू धर्म पर बड़ा सुझाव देकर खड़ा किया था विवाद: अक्टूबर 2021 में जस्टिस शेखर यादव ने एक फैसले में विवादित सुझाव दिया था। सरकार से राम, कृष्ण, रामायण, गीता, महर्षि वाल्मीकि और वेद व्यास को राष्ट्रीय सम्मान और विरासत का दर्जा देने के लिए एक कानून लाने पर विचार करने के लिए कहा था। यह भी कहा था कि भगवान राम हर नागरिक के दिल में रहते हैं। भारत उनके बिना अधूरा है। वह देवताओं की अश्लील तस्वीरें बनाने के आरोपी को जमानत पर फैसला दे रहे थे। उनका सुझाव यह भी था कि भारत की सांस्कृतिक विरासत पर बच्चों के लिए स्कूलों में अनिवार्य पाठ होने चाहिए। अकबर-जोधाबाई अंतर धार्मिक विवाह के अच्छे उदाहरण: अंतर-धार्मिक विवाह पर उनकी टिप्पणी सुर्खियां बन गईं थीं। जून 2021 में वह धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। उस पर एक लड़की के अपहरण और जबरन मुस्लिम धर्म कबूल कराने का आरोप था। जज ने कहा था कि अगर बहुसंख्यक समुदाय का कोई व्यक्ति अपमान के बाद अपने धर्म से धर्मांतरण करता है, तो देश कमजोर हो जाता है। अकबर और जोधाबाई को अंतर धार्मिक विवाह के अच्छे उदाहरण के रूप में बताया था। —————– यह खबर भी पढ़ें… आगरा में BJP नेता का डांसर के साथ VIDEO, होटल संचालक को वसूली के लिए धमकाया; जिलाध्यक्ष बोले- हमारी पार्टी का नहीं
आगरा में खुद को भाजपा नेता बताने वाले महिपाल चौधरी का अब होटल में डांसर के साथ वीडियो सामने आया है। इसमें महिपाल कुर्सी पर बैठा दिख रहा। कमरे में दो लड़कियां डांस कर रही हैं। हालांकि, ये वीडियो कब का है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। महिपाल चौधरी खुद को भाजपा का मीडिया प्रभारी बताता है। शहर में कई जगह लगे पोस्टर में भी उसने खुद को भाजपा नेता बताया है। हालांकि, आगरा भाजपा के महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने दावा किया कि महिपाल चौधरी हमारी पार्टी का नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…