‘योगीजी आपने कहा था- पुलिस भर्ती में उम्र छूट मिलेगी’:ब्राह्मण विधायक ने याद दिलाया वादा, कई मंत्री और MLA ने लिखे लेटर

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यूपी पुलिस में 32,679 पदों पर निकली भर्ती में एज लिमिट (आयु सीमा) विवाद अब सरकार की गले की फांस बनता जा रहा है। अभ्यर्थियों के बाद अब एज लिमिट बढ़ाए जाने की मांग सरकार के भीतर से उठने लगी है। राज्य मंत्री डा. अरुण कुमार सक्सेना, भाजपा के विधायक डा. शलभ मणि त्रिपाठी, विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी और दिनेश रावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की आयु सीमा 22 वर्ष से बढ़ाकर 25 वर्ष किए जाने की मांग की है। विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी ने सीएम योगी को उनका वादा याद दिलाया। लेटर में लिखा- 18 नवंबर, 2025 को गोरखपुर जनता दरबार में और 15 दिसंबर, 2015 को लखनऊ में जनता दरबार में आपने वादा किया था कि अभ्यर्थियों को तीन साल की छूट प्रदान की जाएगी। लेकिन नोटिफिकेशन जारी होने पर उसमें तीन साल की छूट प्रदान नहीं की गई। इससे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अभ्यर्थियों की मांग का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार की लापरवाही के कारण पुलिस भर्ती में देरी हुई है। इससे कई अभ्यर्थी इस परीक्षा को लेकर अयोग्य हो गए हैं। नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को छूट देने की मांग की है। विधायकों ने क्या-क्या कहा, पढ़िए… इस विवाद में बाहुबली धनंजय सिंह ने भी सीएम योगी से एज लिमिट बढ़ाए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा- सिपाही भर्ती में जहां आरक्षित वर्ग की आयु सीमा 18 से 27 वर्ष निर्धारित है, उस सापेक्ष सामान्य वर्ग को 18 से 22 वर्ष आयु सीमा (आरक्षण नियमावली के तहत) निर्धारित है लेकिन सिपाही भर्ती अंतर्गत आने वाले कुछ पदों पर भर्ती कोरोना व अन्य कारणों से पिछले कई साल से लंबित है , जिसके मद्देनजर सामान्य वर्ग को भी आयु सीमा में रियायत मिलनी चाहिए। मैं मुख्यमंत्री समेत पुलिस भर्ती चयन बोर्ड से आग्रह करता हूं कि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के संग न्यायोचित फैसला लेते हुए तय आयु सीमा 18-25 वर्ष करने पर विचार करें। भर्ती बोर्ड अध्यक्ष बोले- मांग के अनुरुप जारी किया नोटिफिकेशन अभ्यर्थी बोले- पीएसी और जेल वार्डर की सात साल बाद आई भर्ती
अभ्यर्थियों का कहना है कि पीएसी (PAC) और जेल वॉर्डर जैसे पदों पर भर्तियां लगभग 7 साल बाद आई हैं। सामान्य वर्ग के लिए आयु सीमा 18 से 22 वर्ष निर्धारित की गई है। कोरोना काल और भर्तियों में देरी की वजह से लाखों योग्य उम्मीदवार बिना परीक्षा दिए ही भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं। हमारी मांग है कि सरकार सभी वर्गों के लिए आयु सीमा में कम से कम 3 वर्ष की बढ़ोत्तरी करे। अब भर्ती के बारे में जानिए… 31 दिसंबर की शाम योगी सरकार ने 32, 679 पदों पर सीधी भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया। इनमें सिविल पुलिस के अलावा PAC, विशेष सुरक्षा बल यानी SSF, महिला बटालियन, घुड़सवार पुलिस और जेल वार्डर तक के पद शामिल किए। सिविल पुलिस में 10,469 पदों पर महिला और पुरुष अभ्यर्थियों की भर्ती होगी। जबकि PAC में पुरुषों के लिए 15,131 पद खाली हैं। UP SSF में पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 1341 वैकेंसी है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 31 दिसंबर से 30 जनवरी, 2026 तक चलेगी। आवेदन करने से पहले upprpb.in पोर्टल पर वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) जरूरी है। साल 2025 में यह दूसरी बड़ी भर्ती है। इससे पहले 60,244 पदों पर सिपाही भर्ती हुई थी। कितनी फीस लगेगी? क्या शैक्षिक योग्यता होनी चाहिए?
आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी किसी भी बोर्ड से 12वीं पास होना चाहिए। आवेदन करते समय अभ्यर्थी के पास आवश्यक शैक्षिक योग्यता होनी चाहिए। अतिरिक्त योग्यता, जो मदद करेंगे नोट- इन सर्टिफिकेट्स के आधार पर कुछ अभ्यर्थियों को समान अंक होने की स्थिति में प्राथमिकता दी जाती है। इसमें कोई अतिरिक्त अंक नहीं दिए जाएंगे, बल्कि बराबर अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों में चयन के समय प्राथमिकता तय की जाएगी। एज लिमिट क्या है? हालांकि सामान्य की एज लिमिट को लेकर विरोध शुरू हो गया है। वॉयस ऑफ ब्राह्मण नाम के X यूजर ने लिखा- अधिकांश राज्यों में पुलिस भर्ती की आयु-सीमा 18 से 25 वर्ष सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित है। लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आयु-सीमा 18 से 22 वर्ष रखी गई है, जो कि युवाओं के साथ अन्याय है। इस कारण सामान्य वर्ग के लाखों मेहनती छात्र अवसर से वंचित हो रहे हैं और मानसिक रूप से परेशान हैं। जबकि OBC और SC वर्ग को 5 वर्ष की आयु-छूट प्रदान की जाती है। हमारी मांग है कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती की आयु-सीमा को भी 18 से 25 वर्ष किया जाए। ताकि सभी वर्गों के युवाओं को समान अवसर मिल सके। सात स्लाइड्स में देखिए कहां कितने पदों पर भर्ती होगी… आखिर में जरूरी प्रोसेस भी जानिए… OTR प्रक्रिया (One Time Registration) क्या है?
यूपी पुलिस समेत कई सरकारी भर्तियों में OTS/OTR का मतलब है One Time Registration (एक बार पंजीकरण) यानी एक बार आप अपनी बेसिक जानकारी, योग्यता, पहचान व संपर्क विवरण बोर्ड के पोर्टल पर दर्ज कराते हैं, जिससे आपको बार-बार आवेदन भरते समय वही जानकारी हर बार नहीं भरनी पड़े। यह विभागीय भर्ती में आवेदन की पहली अनिवार्य कड़ी होती है, और इसका मकसद भर्तियों को अधिक प्रोफेशनल, पारदर्शी और एक्सेप्शन-लेस बनाना है। OTR में क्या-क्या करना होता है?
One Time Registration में अभ्यर्थी को सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट (जैसे uppbpb.gov.in) पर जाकर अपनी पहचान और शैक्षिक योग्यता से जुड़ी बुनियादी जानकारी दर्ज करनी होती है। इस प्रक्रिया में आम तौर पर यह शामिल होता है- एक बार OTR पूरा हो जाने के बाद आपकी प्रोफ़ाइल सिस्टम में सेव हो जाती है। इसके बाद जब भी आप यूपी पुलिस या किसी अन्य बोर्ड की भर्ती के लिए आवेदन भरेंगे, तो आपके आधार-बद्ध विवरण अपने-आप आ जाते हैं। OTR क्यों ज़रूरी है?
फ़्यूचर रिकग्निशन: अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में सिस्टम आप ही-आप आपका रिकॉर्ड पहचान लेता है।
गलती की संभावना कम: बार-बार डेटा टाइप करने की बजाय एक बार दर्ज डेटा इस्तेमाल होता है।
पारदर्शिता बढ़े: आधार आधारित पंजीकरण से फर्जी आवेदन की संभावना घटती है।
डेटा मैनेजमेंट सरल: बोर्ड को अभ्यर्थियों का डेटा अच्छे से ट्रैक और प्रोसेस करने में मदद मिलती है। आपको कब OTR करना है?
OTR करना अनिवार्य है। बिना वन टाइम रजिस्ट्रेशन किए आप आवेदन नहीं भर पाएंगे।
OTR की प्रक्रिया ऑनलाइन ही पूरी होती है।
एक बार OTR होने पर उस रजिस्ट्रेशन नंबर / पासवर्ड से आगे का पूरा आवेदन मैनेज होता है। ………………………………………….. यह खबर भी पढ़ें सपा की गुपचुप क्या बसपा से चल रही बातचीत?:बिहार नतीजों के बाद यूपी में सपा, कांग्रेस के गठबंधन को लेकर सुर बदले यूपी की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले फिर से गठबंधन की बिसात बिछने लगी है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांशीराम की पुण्यतिथि पर भले ही बड़े दलों से दूरी का ऐलान कर दिया हो। लेकिन, बिहार चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बदले तेवरों ने सियासी चर्चाओं को नई हवा दे दी है। सवाल ये नहीं कि बसपा गठबंधन में जाएगी या नहीं। सवाल है कि अगर मायावती ने रुख बदला तो यूपी की सत्ता का गणित किस हद तक उलट-पलट सकता है। पढ़ें पूरी खबर…