टीबी से मरी महिला, चंदे के पैसे से अंतिम संस्कार:फरीदाबाद के सरकारी अस्पताल में एम्बुलेंस नहीं दी, सब्जी के ठेले पर ले जानी पड़ी लाश

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हरियाणा के फरीदाबाद में एक व्यक्ति को अपनी पत्नी का टीबी की बीमारी का इलाज इतना महंगा पड़ा कि मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार करने के लिए भी व्यक्ति के पास रुपए नहीं बचे। उसने पड़ोसियों और रिश्तेदारों से चंदा इकट्‌ठा कर पत्नी का अंतिम संस्कार किया। इतना ही नहीं, व्यक्ति को सरकारी अस्पताल से घर पत्नी का शव लाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा भी नहीं मिली थी। अनपढ़ और जानकारी का अभाव होने के चलते उसे सरकारी अस्पताल के स्टाफ ने गुमराह किया, और प्राइवेट एम्बुलेंस में शव ले जाने को कहा। हालांकि, व्यक्ति के पास पैसे ही नहीं थे, इसलिए वह अस्पताल से सब्जी के ठेले पर शव लेकर घर गया। अब इस घटना पर अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ है तो यह बहुत शर्मनाक है। इसकी पूरी जांच की जाएगी और इसके लिए जिम्मेदार स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महिला की मौत 3 पॉइंट्स में… सिस्टम के मारे पति ने परेशानी की कहानी… मृतका के 2 बच्चे, बिहार से आकर बनाया घर
मृतका अनुराधा मूल रूप से बिहार के दरभंगा की रहने वाली थी। उसके के दो बच्चे हैं, जिनमें 12 साल का बेटा राजकुमार और 19 साल की बेटी खुशबू है। बेटी की शादी हो चुकी है। झुनझुन बेलदारी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। मौजूदा समय में वह फरीदाबाद के गांव सरुरपुर इलाके में तुलसी कॉलोनी में 50 गज में अपना मकान बनाकर रह रहे हैं। पूरी घटना पर अस्पताल ने दी सफाई इस घटना पर बीके अस्पताल के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग की एम्बुलेंस में डेडबॉडी ले जाने का प्रावधान नहीं है। मृतकों के लिए हर्ष वैन या मॉर्च्युरी वैन की व्यवस्था होती है, जो रेडक्रॉस के माध्यम से दी जाती है। डिप्टी सिविल सर्जन का कहना है कि यदि किसी परिजन को शव ठेले पर ले जाना पड़ा है तो इस मामले की जांच कराई जाएगी। इमरजेंसी में मौजूद किस स्वास्थ्यकर्मी ने पीड़ित को गलत जानकारी दी, जिससे वह गुमराह हुआ और उसे सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया? इसकी जांच होगी और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।