पीएम मोदी का दिग्विजय पर नाम लिए बगैर तंज:कहा- जो खुद को राजा माने, वे आर्थिक असमानता की बात करे, यही दिन देखने बाकी रह गए थे?

Spread the love

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के सीनियर नेता और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह का नाम लिए बगैर राज्यसभा में उन पर तंज कसते हुए कहा है कि जो खुद को राजा माने, वह आर्थिक असमानता की बात करे तब लगता है कि यही दिन देखने को बाकी रह गए थे क्या? पीएम मोदी का यह वक्तव्य अब सोशल मीडिया पर वायरल है, उधर दिग्विजय सिंह ने सदन में वक्तव्य के दौरान इसके पहले मोदी सरकार और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरा था। पीएम बोले- वे खुद को राजा कहलाने में गर्व करते हैं राज्य सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद का उच्च सदन राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है। जो चर्चा देखी, उसे देखकर मन कहता है कि चर्चा का स्तर थोड़ा ऊपर होना चाहिए। इतने साल तक सरकार में रहे हैं तो स्तर ऊंचा होना चाहिए लेकिन उन्होंने ये मौका भी गंवा दिया। मैं कल एक सदस्य को सुन रहा था वे खुद को राजा कहलाने में गर्व करते हैं। आर्थिक असमानता की चर्चा कर रहे थे। बताइये जो खुद को राजा माने और वह आर्थिक असमानता की बात करे तो लगता है कि यही दिन देखने को बाकी रह गए थे क्या? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार शाम यह बात तब कही जब राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दे रहे थे। पीएम मोदी के निशाने पर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और कांग्रेस की अगुवाई वाले प्रधानमंत्री थे। मोदी सरकार के साथ शिवराज को घेरा था दिग्विजय ने इसके पहले राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने मप्र को बासमती चावल पर जीआई टैग न मिलने का मुद्दा गुरुवार को उठाया। अपने वक्तव्य में मोदी सरकार को घेरने के साथ दिग्विजय ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी घेरा था। दिग्विजय ने कहा था कि प्रदेश में हर साल 4 लाख टन बासमती चावल का उत्पादन होता है, जो गुणवत्ता में अन्य राज्यों से बेहतर है। बावजूद इसके जीआई टैग न होने से यह चावल पंजाब जा रहा है, जहां व्यापारी अपना टैग लगाकर मुनाफा कमा रहे हैं। सदन में सिंह ने कहा कि मप्र के किसानों को सोची-समझी साजिश के तहत हक से वंचित किया जा रहा है और इसमें राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने बताया कि मप्र को 2013 में जीआई टैग मिला था, जिसे 2016 में निरस्त कर दिया गया। यह है मप्र के बासमती का जीआई टैग का मामला मप्र में बासमती चावल के जीआई टैग को लेकर विवाद कृषि और खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के बीच 16 सालों से चल रहा है। एपीडा का तर्क है कि बासमती एक विशेष भौगोलिक पहचान है, जो केवल हिमालय के तलहटी वाले भारत-गंगा के मैदानी इलाकों में पैदा होता है। वर्तमान में बासमती का जीआई टैग 7 राज्यों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्से के पास है। मप्र के सीहोर, नर्मदापुरम, विदिशा, रायसेन, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, जबलपुर और नरसिंहपुर जिले में बासमती चावल होता है