श्राद्ध से तर्पण तक, तिल के बिना क्यों अधूरा माना जाता है हिंदू धर्म का हर शुभ कार्य, जानें कैसे हुई इसकी उत्पत्ति?

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Importance of Til in Hindu Dharma: क्या आप जानते हैं कि जिस तिल का उपयोग हम दान और व्यंजनों में करते हैं, उसकी उत्पत्ति स्वयं भगवान विष्णु के पसीने से हुई थी? गरुड़ पुराण की यह रोचक कथा तिल को साधारण से दिव्य बनाती है. पंडित राजेंद्र जोशी के अनुसार, जब भगवान ने हिरण्याक्ष के वध के लिए वराह अवतार लिया, तब उनके क्रोध से निकले पसीने की बूंदें धरती पर तिल के रूप में प्रकट हुईं. यही कारण है कि मकर संक्रांति से लेकर श्राद्ध कर्म तक, तिल का दान पापों का नाश करने वाला और पुण्यदायी माना गया है.