देहरादून में डॉ. मोहन भागवत ने पूर्व सैनिकों संग संवाद में राष्ट्रीय सुरक्षा, अग्निवीर योजना, हिंदू पहचान, भ्रष्टाचार, पलायन और समान नागरिक संहिता पर विचार रखे. नेपाल, बांग्लादेश, कश्मीर एवं पड़ोसी देशों के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि ये सभी ऐतिहासिक रूप से एक ही सांस्कृतिक भू-भाग के अंग रहे हैं. कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत के विरुद्ध चल रही विरोधी मुहिमों के प्रति सतर्क एवं दृढ़ नीति आवश्यक है.
‘दो बार प्रतिबंध झेलने के बाद भी संघ…’ मोहन भागवत ने क्यों किया विंस्टन चर्चिल का जिक्र?
