खेतों की थाप पर गूंजता इतिहास, क्या है कुमाऊं की हुड़किया बौल परंपरा? जानिए रहस्य

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अल्मोड़ा: पहाड़ की मिट्टी में रची-बसी कुमाऊँ की प्राचीन लोकगायन परंपरा हुड़किया बौल आज भी खेतों में गूंजती है. हुड़के की थाप पर गाए जाने वाले ये लोकगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, सामूहिक श्रम और पहाड़ी जीवन की आत्मा हैं. जब धान की रोपाई या खेतों में काम होता है, तब हुड़किया बौल की लय श्रमिकों में ऊर्जा, उत्साह और एकता का संचार करती है. यह लोकपरंपरा प्रकृति, संस्कृति और किसान जीवन के गहरे रिश्ते को जीवंत रूप में दर्शाती है.