गोपालगंज जिले में 8 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 33 हजार 360 मतदाता ऐसे हैं, जो पहली बार वोट डालेंगे, जबकि 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 3 लाख 83 हजार 417 मतदाता पहले से पंजीकृत हैं। इस बार के विधानसभा के चुनाव में जिले की सियासत में युवाओं की भूमिका सबसे निर्णायक मानी जा रही है।
जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों में बैकुंठपुर, बरौली, गोपालगंज, कुचायकोट, भोरे और हथुआ में कुल 4 लाख 17 हजार 777 युवा मतदाता ऐसे हैं, जो प्रत्याशियों की किस्मत का पासा पलटने की क्षमता रखते हैं। इनमें 2020 के चुनाव की तुलना में इस बार युवा मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, 18-19 वर्ष के नए मतदाताओं में सबसे अधिक संख्या गोपालगंज विधानसभा क्षेत्र में 5,993 है, जबकि सबसे कम बरौली विधानसभा में 5,161 युवा पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में युवा वोटरों की हिस्सेदारी इतनी महत्वपूर्ण है कि यदि ये एकजुट होकर किसी उम्मीदवार या दल के पक्ष में मतदान करें, तो पूरा चुनावी गणित बदल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव युवा बनाम पारंपरिक समीकरण की जंग साबित हो सकता है।
बेरोजगारी, शिक्षा, तकनीकी विकास, स्टार्टअप और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे युवाओं के लिए अहम हैं, और वे उन्हीं प्रत्याशियों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं जो इन विषयों पर ठोस विजन पेश कर रहे हैं। जिले के कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में चल रही चर्चाओं का बाजार गर्म है कि युवा इस बार मतदान के प्रति सजग और मुखर हैं।
युवा मतदाताओं के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सभी प्रमुख दल भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस और जन सुराज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए युवाओं तक पहुंचने की रणनीति बना रहे हैं। टिकट वितरण में भी दलों ने कई युवा चेहरों को मौका देकर इस वर्ग को साधने की कोशिश की है। खासकर प्रथम बार वोट देने वाले मतदाता चुनाव प्रचार के केंद्र में हैं निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इस बार जिले में मतदान का प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि युवा मतदाता न केवल अपने अधिकार को लेकर जागरूक हैं, बल्कि दूसरों को भी मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
