वरुण एरोन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है, जो कि एक प्रशंसनीय निर्णय है। उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2024-25 में झारखंड के बाहर होने के बाद यह घोषणा की। एरोन ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने 20 साल के करियर में कई चोटों का सामना किया, लेकिन उन्होंने अपने शौक और समर्पण के साथ वापसी की।
वरुण एरोन ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, “मैंने अपने 20 साल के करियर में कई चोटों का सामना किया है, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। मैं अपने फिजियो, ट्रेनर और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के कोचों को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने मुझे अपने करियर में मदद की।” उन्होंने अपने जीवन की छोटी-छोटी खुशियों का लुत्फ उठाने का फैसला किया है, लेकिन वे क्रिकेट से जुड़े रहेंगे।
वरुण एरोन ने 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला वनडे मैच खेला था। उन्होंने भारत के लिए 9 टेस्ट और 9 वनडे मैच खेले। उन्होंने फर्स्ट क्लास करियर में 66 मैचों में 33.27 की औसत से 173 विकेट लिए। एरोन ने 150 kmph से ज्यादा की रफ्तार से गेंद फेंककर अपनी पहचान बनाई थी। वे एक प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज थे, लेकिन चोटों ने उनके करियर को प्रभावित किया।
वरुण एरोन ने अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच 2015 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेला था। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में 88 लिस्ट ए मैच खेले, जिसमें उन्होंने 26.47 की औसत और 5.44 की इकोनॉमी रेट से 141 विकेट लिए। उन्होंने टी-20 में 95 मैचों में 8.53 की इकॉनमी रेट के साथ 93 विकेट लिए। एरोन ने 2022 में गुजरात टाइटंस के साथ आईपीएल चैंपियन बनें थे। वे एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर थे, और उनका संन्यास एक बड़ा नुकसान है। लेकिन वे क्रिकेट कमेंटेटर के रूप में अपने जुनून को जारी रखेंगे।
