Pithoragarh News: भले ही आज शहरों में बचपन मोबाइल स्क्रीन और वीडियो गेम्स में कैद हो गया है, वहीं उत्तराखंड के पहाड़ों में आज भी देसी खिलौनों का जलवा बरकरार है. बांस की लकड़ी और एल्युमिनियम के कबाड़ से बनी ये छोटी गाड़ियां न सिर्फ बच्चों को शारीरिक रूप से फौलादी बना रही हैं, बल्कि उन्हें प्रकृति के करीब भी रख रही हैं. आर्मी से रिटायर नरेंद्र सिंह ने बताया कि, इन खेलों में जो सुकून है वो इंटरनेट की दुनिया में कहीं नहीं है.
Uttarakhand: रिमोट कंट्रोल कार नहीं, पहाड़ों में आज भी हाथ से चलने वाली इस गाड़ी का जलवा, बच्चों की है पहली पसंद
