मौलाना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार और याचिकाकर्ताओं की दलीलों को ध्यान में रखते हुए बिल पर संतुलित और बेहतरीन फैसला दिया है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन यूपी वक्फ बोर्ड की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि छोटी सी मस्जिद, कब्रिस्तान या दरगाह की कमेटी बनाने के लिए भी लोगों को सालों बोर्ड के चक्कर लगाने पड़ते हैं और बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “लखनऊ में मशहूर है कि वक्फ बोर्ड के दफ्तर की एक-एक ईंट पैसा मांगती है।” मौलाना ने कहा कि जब प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, तो मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था वक्फ बोर्ड पर कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने मांग की कि बोर्ड से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन जिलों में मुकदमे दर्ज हैं, वहां कार्रवाई तेज हो।
सपा और बसपा शासनकाल पर हमला बोलते हुए मौलाना रज़वी ने आरोप लगाया कि मौजूदा अध्यक्ष अखिलेश यादव के खासमखास हैं। वे बसपा शासन में पांच साल, सपा शासन में पांच साल और भाजपा शासन में लगातार आठ साल से पद पर जमे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि आखिर भाजपा सरकार किस आधार पर समाजवादी पार्टी समर्थक को लगातार पद पर बनाए हुए है।
