हरियाणा के नए पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी प्रक्रिया तेज कर दी है। सूत्रों की मानें तो अगले सप्ताह 29 दिसंबर तक यूपीएससी में बैठक हो सकती है। बैठक से पहले यूपीएससी की ओर से हरियाणा सरकार को दो नामित अफसरों को भेजने की सूचना दी जाएगी। बताया गया कि आयोग ने पैनल में शामिल सभी 5 अफसरों का डोजियर तैयार कर लिया है। इसी कड़ी में ही डीजीपी नियुक्ति के लिए तीन आईपीएस अधिकारियों के पैनल के चयन के लिए गठित समिति की बैठक निर्धारित करने से पहले यूपीएससी ने चंडीगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसमें पूर्व डीजीपी शत्रुजीत कपूर का नाम शामिल है। UPSC को सरकार ने भेजी जानकारी यूपीएससी तीन आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल तैयार कर डीजीपी के चयन के लिए इसे राज्य सरकार को भेजेगा। बताया गया कि हरियाणा सरकार की ओर से यूपीएससी की ओर से मांगी गई सभी डिटेल को भेज दिया गया है। दरअसल कार्यवाहक डीजीपी ओपी सिंह, 31 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में नए साल यानी 1 जनवरी 2026 को हरियाणा में नए डीजीपी की नियुक्ति हो जाएगी। आईपीएस पूरन कुमार सुसाइड केस में कपूर का नाम आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार के सुसाइड मामले में फाइनल नोट के आधार पर पूर्व डीजीपी शत्रुजीत कपूर सहित 15 आईएएस-आईपीएस अफसरों के खिलाफ सुसाइड के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। लिहाजा यूपीएससी ने 5 अफसरों के पैनल में शामिल शत्रुजीत कपूर के मामले में सरकार से एफआईआर की डिटेल मांगी थी। इसके अलावा, यूपीएससी ने पूर्व डीजीपी कपूर के वेतनमान के बारे में भी जानकारी मांगी है, जो पुलिस बल प्रमुख (एचओपीएफ) होने के नाते वेतनमान के 17वें स्तर पर थे। FIR नहीं बनेगी डीजीपी बनने में बाधा यूपीएससी ने 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी एसके जैन का पूरा सर्विस रिकॉर्ड भी मांगा है। जैन को तीन आईपीएस अधिकारियों के पैनल में जगह मिलने की संभावना कम है क्योंकि वे पुलिस बल का नेतृत्व करने के लिए जरूरी मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। वहीं अफसरों की माने तो यूपीएससी द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब भेज दिए गए। बताया गया कि आईपीएस सुसाइड मामले में अभी तक चंडीगढ़ पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल नहीं किया है। ऐसे में किसी अफसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना उसके पैनल में चुने जाने में बाधा नहीं है। पैनल में 5 आईपीएस अफसरों के नाम हरियाणा सरकार ने 16 दिसंबर को यूपीएससी को 5 अधिकारियों शत्रुजीत कपूर (1990 बैच), एसके जैन (1991 बैच), अजय सिंघल (1992 बैच), आलोक मित्तल और अर्शिंदर चावला (दोनों 1993 बैच) के रिकॉर्ड सहित एक प्रस्ताव भेजा था। कपूर ने न्यूनतम कार्यकाल के दो वर्ष पूरे कर लिए थे और साथी आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के बढ़ते दबाव के बीच उन्हें 14 अक्टूबर को छुट्टी पर भेज दिया गया था। 14 अक्टूबर को कपूर छुट्टी पर चले गए और 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह को राज्य के डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। 14 अक्टूबर को कपूर की हुई छुट्टी इस पूरी प्रक्रिया में 14 दिसंबर को कपूर को डीजीपी के पद से हटा दिया गया, जब यूपीएससी ने हरियाणा के प्रस्ताव को यह कहते हुए लौटा दिया कि पुलिस सुधारों पर सुप्रीम कोर्ट (SC) के फैसले के अनुसार, राज्य सरकार को रिक्ति की आशंका में आयोग को अपना प्रस्ताव भेजना आवश्यक है और चूंकि कपूर केवल अवकाश पर थे और किसी भी समय राज्य डीजीपी के रूप में वापस कार्यभार संभाल सकते हैं, इसलिए ओपी सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद कोई रिक्ति नहीं होगी। राज्य सरकार ने पांच आईपीएस अधिकारियों के रिकॉर्ड भेजते समय, यूपीएससी को दिए गए अपने प्रस्ताव में 14 अक्टूबर से कपूर के छुट्टी पर होने के कारणों का उल्लेख किया था, जिसमें चंडीगढ़ एफआईआर का रजिस्ट्रेशन भी शामिल था।
UPSC ने IPS सुसाइड केस की डिटेल मांगी:इसमें पूर्व DGP कपूर का नाम; 5 अफसरों का डोजियर तैयार, अगले हफ्ते मीटिंग होने के आसार
