एक साल बाद भी सूना पड़ा मुख्तार का फाटक: बेटे को जमानत, पत्नी लापता!

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गाजीपुर का फाटक, जो कभी बाहुबली मुख्तार अंसारी की शक्ति का प्रतीक माना जाता था, अब शांत और सुनसान है। पांचवी पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में दैनिक भास्कर की टीम ने यूसुफपुर कस्बे में स्थित अंसारी परिवार के पुश्तैनी घर का दौरा किया। 28 मार्च 2023 को बांदा की जेल में मुख्तार अंसारी का निधन हुआ था, और अब उनकी एक साल की पुण्यतिथि पर इलाके में सब कुछ बदल गया है। सियासत में आ रही चुनौतियाँ और अंसारी परिवार का वर्तमान क्या है, यह जानने के लिए संवाददाताओं ने सांसद अफजाल अंसारी से बातचीत की।

फाटक पर पहुँचते ही वातावरण में एक उदासी का अनुभव होता है। यह वह स्थान था जहाँ स्थानीय लोग अक्सर विवादों का समाधान खोजने के लिए आते थे। लेकिन अब, यहाँ केवल सन्नाटा है। मुख्तार अंसारी के बड़े भाई, अफजाल अंसारी ने बताया कि वे 30 मार्च को मुख्तार की पुण्यतिथि मनाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, क्षेत्रीय विधायक अब्बास अंसारी, जो नवंबर 2022 से जेल में थे, अब जमानत पर हैं। हालाँकि, उन्हें सरकारी आवास में रहने की अनुमति मिली है और प्रशासन की स्वीकृति के बाद ही अपने निर्वाचन क्षेत्र में जा सकते हैं।

गाजीपुर में मुख्तार अंसारी के प्रति लोगों की राय बहुत विविध है। कुछ उन्हें ‘मसीहा’ मानते हैं, जबकि अन्य उन्हें ‘अत्याचारी’ मानते हैं। गाँव के निवासियों का कहना है कि मुख्तार गरीबों का मददगार था, लेकिन कुछ उच्च जातियों के लोग उससे जलते थे। दूसरी ओर, लोगों का मानना है कि पूर्वांचल की राजनीति ने नया मोड़ लिया है, और अब ये अत्याचारियों का समय समाप्त हो चुका है। लोग अब उच्च जातियों के सियासी विचारों को मानते हैं।

मुख्तार के परिवार की स्थिति की बात करें, तो उनका परिवार कई कानूनी परेशानियों में उलझा हुआ है। मुख्तार की पत्नी, अफशां अंसारी, कई मामलों में आरोपी हैं और फरार हैं। उनके बेटे अब्बास अंसारी को भी कई आरोपों का सामना करना पड़ा है, जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी अधिकारियों को धमकी देने के मामले शामिल हैं। दूसरी ओर, उनके छोटे बेटे उमर अंसारी ने भी अपने पिता की मौत के बाद समुदाय में कोई सक्रियता नहीं दिखाई है।

मुख्तार अंसारी के बड़े भाई, सिबगतुल्लाह अंसारी, जिन्होंने राजनीति छोड़ दी है, के बेटे सुहेब अंसारी अब सपा से विधायक हैं। वहीं, अफजाल अंसारी, जो गाजीपुर से समाजवादी पार्टी से सांसद हैं, को हाल ही में सजा सुनाई गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सदस्यता बहाल कर दी। इस तरह, मुख्तार अंसारी की विरासत अब उनके बेटों और परिवार के अन्य सदस्यों के कंधों पर है, जो अपनी पहचान और भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

मुख्तार अंसारी की मौत के एक साल बाद, यह साफ है कि ना सिर्फ उनके परिवार में, बल्कि पूर्वांचल की सियासत में भी कई बदलाव आए हैं। अब देखना यह है कि मुख्तार की छाप कैसे अब्बास और उमर अंसारी के राजनीति में आगे बढ़ने पर असर डालेगी।