सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि 5 अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उमर और शरजील एक साल तक इस मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं। दरअसल, उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद दिल्ली दंगों के आरोप में 5 साल 3 महीने से तिहाड़ में बंद थे। इन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा, ‘अनुच्छेद 21 संवैधानिक व्यवस्था में एक खास जगह रखता है। ट्रायल से पहले जेल को सजा नहीं माना जा सकता। स्वतंत्रता से वंचित करना मनमाना नहीं होगा। UAPA एक खास कानून के तौर पर उन शर्तों के बारे में एक कानूनी फैसला दिखाता है जिनके आधार पर ट्रायल से पहले जमानत दी जा सकती है।’ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 4 बड़ी बातें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद और जस्टिस एनवी अंजारिया ने फैसला सुनाया। आरोपी लंबी कस्टडी का विरोध कर रहे थे, पुलिस ने कहा- आरोपी खुद जिम्मेदार सुप्रीम कोर्ट में आरोपियों की दलील थी कि मामले में लंबे समय से सुनवाई शुरू नहीं हुई है और ट्रायल शुरू होने की संभावना भी कम है। यह भी कहा गया कि वे 5 साल से अधिक समय से जेल में हैं। अब तक उनके खिलाफ दंगे भड़काने से जुड़ा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है और ना आएगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2 सितंबर, 2025 को आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रारंभिक तौर पर शरजील और उमर की भूमिका गंभीर लग रही है। उन पर सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को उकसाने के भी आरोप हैं।
इसके बाद सभी आरोपी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। दिल्ली पुलिस ने इनकी जमानत याचिकाओं का विरोध किया। पुलिस का कहना है कि ये दिल्ली में दंगे भड़काने के मुख्य साजिशकर्ता थे। पुलिस ने कहा है कि सुनवाई में देरी के लिए आरोपी खुद जिम्मेदार हैं और अगर आरोपियों ने मदद की तो ट्रायल दो साल में पूरा किया जा सकता है। पुलिस का दावा- ट्रम्प की यात्रा के समय दंगे करवाना चाहते थे आरोपी पुलिस के मुताबिक, दंगे अचानक नहीं हुए, बल्कि यह पैन-इंडिया स्तर पर (पूरे भारत में) रची गई साजिश थीं, जिनका मकसद ‘सत्ता परिवर्तन’ और ‘आर्थिक दबाव’ बनाना था। पुलिस के अनुसार, CAA को ‘शांतिपूर्ण विरोध’ के नाम पर कट्टरपंथीकरण का जरिया बनाया गया। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि साजिश को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के समय अंजाम देने की योजना थी, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भारत की खींचा जा सके और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाया जा सके। पुलिस ने दावा किया कि इस साजिश को देशभर में दोहराने की कोशिश की गई। इसके लिए कई व्हाट्सएप ग्रुप, दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) और जामिया अवेयरनेस कैंपेन टीम का जिक्र किया गया। —————————– दिल्ली दंगों से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… न्यूयॉर्क मेयर ममदानी ने उमर खालिद के नाम लेटर लिखा: कहा- तुम्हारी चिंता है; 8 अमेरिकी सांसद बोले- उसे जमानत मिले न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने 1 जनवरी 2026 को शपथ लेने के बाद तिहाड़ जेल में बंद छात्र एक्टिविस्ट उमर खालिद को हाथ से लिखी एक चिट्ठी भेजी है। लेटर में ममदानी ने लिखा, “डियर उमर, मैं अक्सर तुम्हारे उन शब्दों को याद करता हूं जिनमें तुमने कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने की बात कही थी। तुम्हारे माता-पिता से मिलकर खुशी हुई। हमें तुम्हारी चिंता है।” ममदानी के बाद 8 अमेरिकी सांसदों ने भी खालिद का समर्थन किया है। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली दंगा केस में उमर खालिद-शरजील को जमानत नहीं मिली:सुप्रीम कोर्ट ने एक साल अपील करने पर रोक लगाई, 5 आरोपियों को बेल
