ईसाई धर्म छोड़कर घर वापसी करने वाले मनबहाल वट्टी पिता देशीराम वट्टी और बहरीन मतियारा पति सरजू मटियारा ने बताया कि कुछ वर्ष पहले वे एक पास्टर के बहकावे में आकर ईसाई धर्म में चले गए थे। लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि अपनी परंपरा, देवी-देवता और संस्कृति से जुड़ाव ही असली पहचान है। उन्होंने बताया कि प्रार्थना सभाओं में उन्हें पारंपरिक पूजा-पद्धति और ग्राम देवी-देवताओं को न मानने का दबाव बनाया जाता था, जिससे गांव में विवाद की स्थिति पैदा हो जाती थी। ग्रामवासियों, जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रयासों से दोनों परिवारों की ‘घर वापसी’ पारंपरिक विधि-विधान से कराई गई। इस दौरान ग्राम गायता, पटेल, मांझी-मुखिया और वरिष्ठ नागरिकों ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद दोनों परिवारों को पुनः ग्राम समाज में शामिल किया।
इस दाैरान भूतपूर्व सरपंच मायाराम मांडवी, युवक समिति अध्यक्ष नोमेश कुमार सुरोजिया, खेदूराम सरोजिया, ग्राम पटेल, वरिष्ठ नागरिक कुमार नेताम, अनुक नेताम, चैनसिंह मंडावी, गम्मूराम साहू, भारत विश्वकर्मा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
राकेशपांडे
