भोपाल मेट्रो को पैसेंजर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे ही हाल इंदौर के भी है। ट्रिप घटाने और टाइमिंग में बदलाव करने के बाद भी ट्रैक पर मेट्रो खाली ही दौड़ रही है। भोपाल में वीकेंड को छोड़ दें तो एक दिन में 200 पैसेंजर भी सफर नहीं करते, जबकि मेट्रो पर सरकार रोजाना करीब 8 लाख रुपए खर्च कर रही है। ऐसे में मेट्रो ‘आमदानी अठन्नी और खर्चा रुपया’ की तरह हो गई है। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने जब भोपाल मेट्रो में पैसेंजर को लेकर रियलिटी चेक की तो तस्वीर अलग ही नजर आई। सुभाषनगर से रानी कमलापति स्टेशन (आरकेएमपी) तक तो भास्कर रिपोर्टर ही बैठे। आगे के स्टेशन के लिए 900 पैसेंजर की कैपेसिटी वाले 3 कोच में सिर्फ 1 पैसेंजर ही बैठा नजर आया। दो ट्रिप…एक रूट पर सिर्फ मेट्रो कर्मचारी दिखें, दूसरी में 1 यात्री
भास्कर रिपोर्टर ने मेट्रो के दो रूट पर बारी-बारी से सफर किया। रानी कमलापति से सुभाषनगर और फिर सुभाषनगर से रानी कमलापति के बीच दो रूट पर टिकट लेकर यात्रा की। स्थिति यह थी कि मेट्रो में पैसेंजर के नाम पर सिर्फ भास्कर टीम ही सवार थी। यहां पर कर्मचारियों को छोड़ सभी यात्री उतर गए। यानी, पैसेंजर के नाम पर मेट्रो में कोई नहीं था। केंद्रीय स्कूल स्टेशन से भी कोई भी यात्री मेट्रो में नहीं बैठा। सुभाषनगर तक मेट्रो बिना पैसेंजर के ही चली। वीकेंड के दिनों में ही यात्रियों की संख्या 500 तक
मेट्रो कॉरपोरेशन के अफसरों ने बताया कि वीकेंद्र के दिनों में यात्रियों की संख्या 500 के पार पहुंच जाती है। आम दिनों में यह संख्या 200 से भी कम तक रहती है। हालांकि, कई बार एम्स से सुभाषनगर तक मेट्रो के तीनों कोच खाली ही जाते हैं। रोज 8 लाख रुपए खर्च, आमदानी 10 हजार भी नहीं
मेट्रो के संचालन, सुरक्षा समेत अन्य व्यवस्था में सरकार हर रोज करीब 8 लाख रुपए खर्च कर रही है। इसमें अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन भी शामिल हैं। इस तरह ढाई महीने में सरकार 6 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। दूसरी ओर, आमदानी के रूप में प्रतिदिन 10 हजार रुपए भी नहीं मिल रहे हैं। रूचि कम होने के 4 बड़े कारण भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट का जमीनी काम साल 2018 में शुरू हुआ था, जो दिसंबर 2025 में पूरा हुआ। 8 साल बाद मेट्रो शुरू हुई, लेकिन कुछ ही दिन में लोगों की मेट्रो के प्रति रूचि कम हो गई। इसकी 4 वजह सामने आई है… 1. 6 किमी के सफर में 35 से 40 मिनट
सुभाषनगर से एम्स तक मेट्रो में सफर की टाइमिंग 25 मिनट है। इसके पहले 10 मिनट स्टेशन पर टिकट लेने, चेकिंग व प्लेटफार्म पर आने में लगते हैं। ऐसे में 6 किमी का सफर 35 से 40 मिनट में तय होता है। 2. मेट्रो की स्पीड कम होना
प्रायोरिटी कॉरिडोर में कुल 6 स्टेशन- सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, आरकेएमपी, डीआरएम, अलकापुरी और एम्स है। इनके बीच की दूरी 1 किमी भी है। इस वजह से स्पीड इतनी कम रहती है कि मेट्रो साइकिल से भी हार गई है। 3. पार्किंग व्यवस्था नहीं
एक भी स्टेशन ऐसा नहीं है, जहां पर पार्किंग की व्यवस्था हो। इस कारण पैसेंजर कम रूचि दिखा रहे हैं। मेट्रो के अंदर एटीएम, फूड जोन या अन्य सुविधाएं भी अभी मौजूद नहीं है। 4. टाइमिंग सही नहीं
जिस रूट पर मेट्रो दौड़ रही है, वहां सरकारी और प्राइवेट ऑफिस ज्यादा है। वहीं, एमपी नगर में बड़ा मार्केट है। दोपहर 12 बजे से एम्स से मेट्रो शुरू होती है, जबकि ऑफिस टाइमिंग एक-डेढ़ घंटा पहले है। वहीं, प्राइवेट सेक्टर 8 बजे तक खुला रहता है, जबकि मेट्रो का संचालन इससे पहले ही बंद हो जाता है। भोपाल मेट्रो के बारे में सिलसिलेवार जानिए भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने किया था। इसके अगले दिन यानी, 21 दिसंबर से कमर्शियल रन शुरू हो गया। इस दिन से आम लोग मेट्रो में सफर करने लगे। पहले दिन 21 दिसंबर को पैसेंजर संख्या 6568 तक पहुंच गई थी। इसके बाद संख्या घटती गई और शुरुआती 14 दिन तक करीब 1 हजार के आसपास ही यात्री मेट्रो में सवार हो रहे थे। मेट्रो में घटती यात्री संख्या के चलते मेट्रो प्रबंधन ने 5 जनवरी को ट्रिप और टाइमिंग दोनों में बदलाव किया। पहले दोनों ओर 17 ट्रिप थी, जिसे घटाकर 13 कर दी गई। वहीं, टाइमिंग सुबह 9 की बजाय दोपहर 12 बजे से कर दी गई। फिर भी न तो संख्या बढ़ी और न ही मेट्रो प्रबंधन की आय में कोई बढ़ोतरी हुई। अभी इस टाइमिंग पर चल रही है मेट्रो… अब ये है टाइमिंग इंदौर में 95% तक घटी यात्री संख्या
इंदौर मेट्रो में यात्रियों की संख्या 90 प्रतिशत तक घट गई है। यहां पिछले साल 21 मई को मेट्रो की शुरुआत हुई थी। उद्घाटन के दिन और उसके बाद हर रोज यात्रियों की संख्या 25 हजार से भी अधिक रही। अब औसत 200 यात्री ही मेट्रो में सवार हो रहे हैं। ऐसे में प्रबंधन के लिए मेट्रो संचालन में नुकसान उठाना पड़ रहा है। यहां एक बार टाइमिंग और ट्रिप दोनों घटाई जा चुकी है। इंदौर में गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन नंबर-3 तक मेट्रो का संचालन किया जा रहा है। ये खबरें भी पढ़िए… 1. साइकिल से हार गई मेट्रो…2 किमी में लगे 7 मिनट कहने को भोपाल देश का 26वां मेट्रो शहर है, लेकिन यहां की मेट्रो की रफ्तार ‘कछुआ चाल’ जैसी है। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक जाने में 4 से 5 मिनट लग रहे हैं, जबकि दूरी 1 किलोमीटर भी नहीं है। 7 किमी का सफर 25 मिनट का है, लेकिन स्टेशन पर इंटर से एग्जिट करने तक में 1 घंटा तक लग रहा है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स भी बन रहे हैं। मेट्रो की स्पीड को लेकर उठ रहे इन्हीं सवालों को लेकर दैनिक भास्कर ने 2 तरह से रियलिटी चेक किया। भास्कर के 2 रिपोर्टर ने डीबी मॉल स्टेशन से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में बैठकर सफर किया, जबकि 2 अन्य रिपोर्टर ने साइकिल से मेट्रो से रेस लगाई। दोनों की रेस में साइकिल मेट्रो से आगे निकल गई। करीब दो किमी के सफर में मेट्रो को 7 मिनट लगे, लेकिन यही दूरी साइकिल से महज 3 मिनट में पूरी हो गई। भोपाल मेट्रो की फुल स्पीड 90Km प्रतिघंटा तक है। पढ़े पूरी खबर 2. भोपाल मेट्रो में पहली बार बैठे यात्रियों ने किया डांस भोपाल में रविवार को मेट्रो के कमर्शियल रन का पहला दिन था। सुबह 9 बजे एम्स स्टेशन से मेट्रो का सफर शुरू हुआ। पूरे दिन कुल 17 ट्रिप हुई। इसमें एम्स से सुभाषनगर के बीच 9 और सुभाषनगर से एम्स के बीच 8 ट्रिप शामिल हैं। संडे के दिन मेट्रो में घूमने के लिए लोगों ने खूब दिलचस्पी दिखाई। शाम 5 बजे 5 हजार से ज्यादा लोग घूम चुके थे। वहीं, आखिरी ट्रिप तक यह आंकड़ा करीब 6 हजार यात्री पहुंच गया। पहले दिन बच्चों की टिकट को लेकर विवाद की स्थिति भी बनी। पढ़े पूरी खबर
ट्रिप घटी, टाइमिंग बदली…फिर भी भोपाल मेट्रो खाली:सुभाषनगर से RKMP तक सिर्फ भास्कर रिपोर्टर ही बैठे; इंदौर में भी ऐसी ही तस्वीर
