50 रुपए किलो बिक रहा टमाटर कब सस्ता होगा:एमपी में 5 साल में जनवरी में सबसे महंगा, फरवरी में दाम और बढ़ेंगे

Spread the love

टमाटर के बिना दाल-सब्जी का स्वाद नहीं बनता, लेकिन टमाटर 50 रुपए किलो तक मिल रहा है। पहले हफ्ते में 2 किलो लेते थे, अब आधा–एक किलो लेकर काम चला रहे हैं। किचन में सब्जी बना रही ममता कहती हैं कि खाने का स्वाद इस समय टमाटर की वजह से थोड़ा फीका है। इसकी वजह है टमाटर के दाम। ममता अकेली नहीं हैं, प्रदेश की हर रसोई में यही चिंता है। जनवरी में सभी सब्जियों के साथ टमाटर के दाम 15 से 20 रुपए किलो रहते थे, लेकिन इस साल अभी भी टमाटर 50 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। चिंता की बात इसलिए है क्योंकि देश में टमाटर की सबसे ज्यादा पैदावार एमपी में ही होती है। यहां का टमाटर दूसरे राज्यों में भेजा जाता है। लेकिन इस बार एमपी की मंडियों में दूसरे राज्यों से टमाटर आ रहा है। भास्कर रिपोर्टर ने बीते सालों में टमाटर के दाम की तुलना की तो पता चला कि 5 साल में पहली बार ऐसा हो रहा है, जब टमाटर के दाम जनवरी महीने में 50 रुपए हैं। सवाल ये है कि देश में सबसे ज्यादा टमाटर पैदा करने वाले राज्य में ही टमाटर महंगा होने की वजह क्या है? टमाटर के रेट कब तक कम होंगे? लोकल मार्केट से टमाटर नहीं आया, इसलिए बढ़े दाम
भोपाल के सब्जी व्यापारी उमेश गुप्ता का कहना है कि इस समय मंडी में मूली-पालक, आलू और दूसरी सब्जियां 15-20 रुपए किलो है जबकि टमाटर 40 से 50 रुपए किलो बिक रहा है। दूसरे सालों में जनवरी तक लोकल किसानों के टमाटर मंडी तक पहुंच जाते थे तो इसका दाम मुश्किल से 15-20 रुपए किलो तक रहता था, लेकिन इस साल लोकल किसानों से अच्छी क्वालिटी के टमाटर नहीं आ पा रहे हैं। इंदौर, धार, देवास, खरगोन, शिवपुरी बेल्ट में कई किसानों की फसल बारिश के कारण प्रभावित हुई। लोकल मंडी में टमाटर की आवक 30–40% तक घट गई। जाहिर है आवक घटने का असर इसकी कीमतों पर भी पड़ रहा है। लोकल सप्लाई की कमी पूरी करने के लिए मंडी को कर्नाटक (बेंगलुरू) और महाराष्ट्र (नासिक, सांगली) से टमाटर मंगाना पड़ रहा है। बाहरी सप्लाई पर ट्रांसपोर्ट, लोडिंग–अनलोडिंग और नुकसान का खर्च जुड़ता है। यही लागत सीधे दाम में जुड़ जाती है। व्यापारियों के मुताबिक बेंगलुरु से आने वाला टमाटर थोक में 35–40 रुपये किलो पड़ रहा है। इसमें मंडी शुल्क और खुदरा मार्जिन जोड़ते ही रेट 50–60 रुपए पहुंच जाता है। दूसरी हरी सब्जियां सस्ती
जनवरी में गोभी, गाजर, मूली, मटर जैसी सब्जियों की पैदावार चरम पर रहती है। ठंडा मौसम इन फसलों के अनुकूल है, इसलिए सप्लाई ज्यादा और दाम कम हैं। किसानों को मिल रहा अच्छा दाम
जनवरी के दौरान टमाटर के दाम सामान्य ही रहते हैं। पिछले 5 सालों में टमाटर 15 से 30 रुपए किलो तक के ही आस-पास रहा, लेकिन इस साल कीमतें दोगुनी से तीन गुना तक है। इंदौर में टमाटर व्यापारी पवन के मुताबिक इस साल टमाटर का बाजार अच्छा जा रहा है। जिन किसानों ने टमाटर की फसल लगाई थी, वो खुश हैं। दिवाली के समय हल्की बारिश से मप्र और बाहर भी टमाटर की फसल खराब हुई। लेकिन जो बची हुई फसल है, उसके अच्छे दाम मिल रहे हैं। खरगोन बामनपुरी के किसान धर्मेंद्र को इस साल टमाटर के अच्छे दाम मिल रहे हैं। धर्मेंद्र ने हाईब्रीड और देसी दोनों तरह के टमाटर खेत में लगाए हैं। धर्मेंद्र ने बताया कि बीते सालों में भी फसल खराब और कम दाम मिलने के कारण किसानों ने इस सीजन में टमाटर का रकबा कम कर दिया। इसके कारण उत्पादन पर भी असर पड़ा है। अक्टूबर में हल्की बारिश से कुछ किसानों की फसलें खराब भी हो गई, इसलिए अच्छे दाम मिल रहे हैं। अभी फौरी राहत मिलेगी, फरवरी में फिर बढ़ेंगे दाम
सब्जी के थोक व्यापारी पवन का मानना है कि अभी ठंड के कारण टमाटर की आवक कम थी लेकिन धूप निकलने के कारण खेत में ही टमाटर पकने लगे हैं, जिससे अब टमाटर के दाम गिरने शुरू होंगे। फरवरी के पहले पखवाड़े तक कीमतें 30 रुपए तक गिर सकती हैं। लेकिन जैसे ही फरवरी में विवाह का सीजन आएगा, फिर कीमतों में उछाल आएगा। बाजार डिमांड और सप्लाई के गणित पर काम करता है। फरवरी में शादियों का सीजन है, इसलिए मांग बढ़ने से कारण दाम में ज्यादा कमी नहीं आएगी। इस खबर पर आप अपनी राय दे सकते हैं…