साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) और टर्फ से बना स्ट्रॉन्ग सिस्टम मध्य प्रदेश को घेरे हुए हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में भोपाल-ग्वालियर समेत 45 जिलों में तेज आंधी चलने और बारिश होने का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार, प्रदेश के बीचोंबीच से एक टर्फ गुजर रही है, जबकि दूसरी टर्फ ऊपरी हिस्से में सक्रिय है। वहीं, पश्चिमी और उत्तरी हिस्से में 2 चक्रवात भी एक्टिव हैं। सतना जिले में शनिवार सुबह तेज हवा चली। फिर गरज-चमक के साथ बारिश होने लगी। मैहर में भी पानी गिरा। नर्मदापुरम में बूंदाबांदी हुई। सिवनी में रिमझिम बारिश हुई। इससे पहले शुक्रवार रात को बरघाट के मंडी गांव में बिजली गिरने से प्रांशू मरकाम (6) और डूंडासिवनी के बंजारी गांव में रमजान खान की मौत हो गई। रायसेन में रामपुर मनियाखेड़ी रोड पर कई खेतों में गेहूं की फसल खराब हो गई। आज जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, दमोह और कटनी में ओले-बारिश का अलर्ट है। वहीं, भोपाल, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, विदिशा, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, रीवा, सतना, मैहर, निवाड़ी और टीकमगढ़ में आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर बना रह सकता है। देखिए, दो तस्वीरें… 50 से 60Km/प्रतिघंटा से चलेगी आंधी मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिन यानी 7 अप्रैल तक प्रदेश में तेज आंधी भी चलेगी। कुछ जिलों में इसकी अधिकतम रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। बाकी में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार रहेगी। अगले 4 दिन ऐसा रहेगा एमपी में मौसम 7 अप्रैल से एक और सिस्टम मध्य प्रदेश में सिस्टम की एक्टिविटी देखने को मिल रही है। 7 अप्रैल से एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) भी सक्रिय होगा। इसकी वजह से 10 अप्रैल तक कहीं आंधी चलेगी तो कहीं बारिश हो सकती है। इसके बाद सिस्टम आगे बढ़ जाएगा और गर्मी का दौर शुरू होगा। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में तेज गर्मी पड़ेगी। आखिरी सप्ताह में ग्वालियर, धार, खरगोन, बड़वानी, नौगांव-खजुराहो में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। वहीं, दतिया, मुरैना, श्योपुर, बड़वानी, खरगोन, धार का तापमान भी बढ़ेगा। दरअसल, अप्रैल महीने में प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्से में गर्म हवाएं चलती हैं। इस वजह से यहां भीषण गर्मी पड़ती है। अप्रैल-मई में सबसे ज्यादा गर्मी जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। इस बार मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा था। मार्च के आखिरी में टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार ऐसा मौसम नहीं रहा। आखिरी 3 दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से पारे में गिरावट आई। इसी तरह अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम का असर मिला-जुला रहेगा। अलग-अलग इलाकों में हीट वेव का आधार अलग मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, तापमान सामान्य से 5°C ज्यादा होने पर हीट वेव मानी जाती है। मैदानी, पहाड़ी और तटीय इलाकों के लिए इसका आधार अलग होता है। मध्य प्रदेश में ज्यादातर मैदानी इलाका है, इसलिए 40 डिग्री के ऊपर हीट वेव की स्थिति बनती है। सीवियर हीट वेव में तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री अधिक रहता है। ग्वालियर-चंबल, उज्जैन और सागर संभाग में ऐसी स्थिति बनती है। फरवरी-मार्च में 4-4 बार बदला मौसम इस साल जनवरी में बारिश नहीं हुई, लेकिन फरवरी और मार्च में 4-4 बार मौसम बदला। फरवरी में शुरुआत से ही दो बार ओले, बारिश और आंधी आई, जिससे फसलों को नुकसान हुआ। 18 फरवरी से तीसरा दौर रहा, जिसका असर 21 फरवरी तक रहा। चौथा दौर 23-24 फरवरी को ओले-बारिश के रूप में आया। मार्च में गर्मी की शुरुआत हुई। पहले पखवाड़े में तेज गर्मी रही। दूसरे पखवाड़े में बारिश शुरू हुई और एक दौर 4 दिन चला। इस दौरान 45 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश और 17 जिलों में ओले गिरे। इससे गेहूं, पपीता और केले की फसलें बर्बाद हुईं। तीसरा दौर 26-27 मार्च को रहा। 27 मार्च को सतना, रीवा, दतिया और भिंड में बारिश हुई। चौथा दौर 29-30 मार्च को रहा। 30 मार्च को आधे प्रदेश में कहीं आंधी-बारिश और कहीं ओले गिरे। MP के 5 बड़े शहरों में अप्रैल में मौसम का ऐसा ट्रेंड एमपी में अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से गर्मी का असर तेज होने लगता है। महीने के आखिरी दिनों में तो तापमान रिकॉर्ड तोड़ देता है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के 10 साल की डाटा बेस्ड स्टडी में सामने आया कि भोपाल-इंदौर में पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है जबकि जबलपुर में आंकड़े ने 44 डिग्री को छू लिया है। ग्वालियर में तो तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। पिछले तीन साल इन शहरों में तेज गर्मी पड़ी। इस बार भी तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है। भोपाल में 1996 में पड़ी थी सबसे ज्यादा गर्मी, बारिश भी हुई अप्रैल में गर्मी के ट्रेंड की बात करें तो भोपाल में 29 अप्रैल 1996 को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। इस महीने भोपाल में बारिश-आंधी के आसार भी बनते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ साल से अप्रैल में बारिश का दौर चल रहा है। 20 अप्रैल 2013 को भोपाल में 24 घंटे के भीतर 30.8 मिमी यानी एक इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 2023 में 22.6 मिमी पानी गिरा था। 17-18 अप्रैल को तापमान 40.9 डिग्री सेल्सियस रहा था। इंदौर में पिछले साल गिरा था 22.3 मिमी पानी इंदौर में भी पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, 25 अप्रैल 1958 को सर्वाधिक 44.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। इस महीने यहां भी मौसम में बदलाव देखने को मिलता है। इसके चलते बादल छाए रहते हैं तो बौछारें भी गिरती हैं। इंदौर में पिछले साल 22.3 मिमी बारिश हुई थी। यहां वर्ष 2014 से 2024 के बीच 6 साल बारिश हो चुकी है। जबलपुर में तेज गर्मी का ट्रेंड जबलपुर की बात करें तो यहां एक बार पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 28 अप्रैल 1970 को दिन का तापमान 45.4 डिग्री रहा था। अप्रैल में यहां भी बारिश होने की संभावना रहती है। रिकॉर्ड के अनुसार, 3 अप्रैल 1935 को 24 घंटे के भीतर 50.3 मिमी बारिश हुई थी। 2023 में 20.2 मिमी बारिश हुई थी। इस साल 19 अप्रैल को अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। ग्वालियर में 46.2 डिग्री पहुंच चुका पारा ग्वालियर में अप्रैल की गर्मी का ट्रेंड बाकी शहरों से अलग रहता है। यहां ज्यादा गर्मी पड़ती है। बीते 10 साल में यहां पारा एक बार 45 डिग्री और 3 बार 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। 28 अप्रैल 1958 को तापमान 46.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। एक दिन में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड वर्ष 1909 में बना था। 22 अप्रैल को कुल 67.6 मिमी बारिश हुई थी। इसी साल अप्रैल महीने में साढ़े 4 इंच पानी गिरा था। 2023 में भी बारिश हुई थी। उज्जैन में भी गर्मी, बारिश का ट्रेंड उज्जैन में भी अप्रैल महीने में गर्मी और बारिश का ट्रेंड रहता है। 18 अप्रैल 2010 को तापमान रिकॉर्ड 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। वहीं, 2014 से 2023 के बीच दो बार पारा 43 डिग्री के पार जा चुका है। पिछले साल एक बार तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। वहीं, पूरे महीने 1 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई थी।
MP के 45 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट:सतना-मैहर में रिमझिम, सिवनी में बिजली गिरने से दो की मौत; रायसेन में फसलें खराब
