राहुल को जान से मारने की धमकी, क्या सजा होगी:सिर पर इनाम रखना आम बात, ऐसे मामले किस कैटेगरी में आते हैं

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यूपी के रायबरेली से सांसद राहुल गांधी समेत 25 सांसदों को घर में घुसकर गोली मारने की धमकी मिली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इससे जुड़ा वीडियो 19 फरवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। हालांकि, पुलिस ने राजस्थान के रहने वाले आरोपी को कुछ ही देर में हिरासत में ले लिया। जनवरी- 2026 में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को भी ऐसी ही धमकी मिली थी। अखिल भारतीय हिंदू महासभा की आगरा जिलाध्यक्ष मीरा राठौर ने उनकी ‘जुबान काटने’ पर एक लाख रुपए के इनाम की घोषणा की थी। इस तरह से जान से मारने की धमकी देना, किसी के खिलाफ ‘इनाम की घोषणा’ करना अपराध की किस श्रेणी में आता है? ऐसी स्थिति में कानून की कौन-सी धाराएं लागू होती हैं? कितनी सजा का प्रावधान है? भास्कर एक्सप्लेनर में पढ़िए… सवाल: क्या किसी को धमकी देना कानूनी तौर पर अपराध है? जवाब: यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह बताते हैं- किसी को जान से मारने या नुकसान पहुंचाने की धमकी देना भारतीय कानून के तहत सीधा अपराध है। मौजूदा कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) में इसे आपराधिक धमकी की श्रेणी में रखा गया है। BNS की धारा 351 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को उसकी जान, शरीर, संपत्ति या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की धमकी देता है। उसका उद्देश्य डर पैदा करना, दबाव बनाना या किसी काम के लिए मजबूर करना है, तो यह दंडनीय अपराध माना जाएगा। विक्रम सिंह के अनुसार, सामान्य धमकी के लिए 2 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अगर धमकी जान से मारने, गंभीर चोट, आगजनी या बड़े अपराध से जुड़ी हो तो 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। इसके साथ ही अगर गुमनाम धमकी हो तो सजा 2 साल और बढ़ जाएगी। सवाल: क्या यह गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है? जवाब: किसी को जान से मारने या गंभीर नुकसान की धमकी देने के मामले में यह अपराध गैर-जमानती की श्रेणी में भी आ सकता है। हालांकि, यह इस बात पर डिपेंड करता है कि धमकी किस प्रकृति की है? किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है? BNS की धारा 351 के तहत दर्ज सामान्य आपराधिक धमकी का मामला अक्सर जमानती होता है। इसमें अधिकतम 2 साल तक की सजा का प्रावधान है। विक्रम सिंह के अनुसार, राहुल गांधी को धमकी वाले मामले में बात सिर्फ बयानबाजी की नहीं, गंभीर आपराधिक धमकी की श्रेणी में आता है। इस तरह की सार्वजनिक और स्पष्ट जान से मारने की धमकी पर BNS , 2023 की धारा 351 सीधे लागू होती है। इस धारा में 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। सवाल: क्या इनाम की घोषणा भी धमकी और उकसावे में गिनी जाएगी? जवाब: पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति यह सार्वजनिक घोषणा करता है कि ‘फलां व्यक्ति की हत्या करने पर 50 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा’, तो यह सिर्फ बयान नहीं, गंभीर आपराधिक कृत्य माना जाता है। ऐसे इनाम की घोषणा दो स्तरों पर अपराध बनती है- धमकी और उकसावा। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह के मुताबिक, इनाम घोषित करना सीधे तौर पर आपराधिक धमकी की श्रेणी में आता है। क्योंकि इससे संबंधित व्यक्ति के मन में जान का भय पैदा होता है। इसे अपराध के लिए उकसावा माना जाता है, क्योंकि इसमें दूसरों को हत्या जैसे संगीन अपराध के लिए प्रेरित किया जाता है। ऐसे मामले में BNS की धारा 351 (आपराधिक धमकी) और BNS की धारा 61 (उकसावा) के तहत दोषी पर 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। भले ही हत्या या हमला वास्तव में हुआ हो या नहीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट नीरज पांडेय कहते हैं- BNS की धारा 351 के तहत जान से मारने या गंभीर नुकसान पहुंचाने की धमकी को आपराधिक माना गया है। इस धारा में दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। सवाल: अपराध पूरा न होने पर भी सजा क्यों? जवाब: कानून मानता है कि सार्वजनिक इनाम की घोषणा से समाज में डर का माहौल बनता है, अपराध को बढ़ावा मिलता है। इसलिए केवल घोषणा करना ही दंडनीय है। भले ही कोई व्यक्ति उस अपराध को अंजाम न दे। सवाल: क्या सिर्फ बयान देने से ही FIR हो सकती है? जवाब: हां। वकील नीरज पाडेंय के अनुसार, सिर्फ बयान या धमकी देने मात्र से भी FIR दर्ज हो सकती है। इसके लिए किसी वास्तविक घटना या हमले का होना जरूरी नहीं। भारतीय कानून में आपराधिक धमकी और उकसावे को पूर्ण अपराध माना गया है। सवाल: क्या कहती है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन? जवाब: सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस साफ कहती हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Free Speech) का अधिकार असीमित नहीं। जहां किसी बयान से हिंसा, धमकी, उकसावा या डर का माहौल पैदा होने लगे, वहीं फ्री स्पीच की सीमा खत्म मानी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई अहम फैसलों में साफ किया है कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को बोलने की आजादी जरूर देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) के तहत इस आजादी पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सवाल: क्या धार्मिक या राजनीतिक भावनाओं के नाम पर धमकी जायज? जवाब: वकील नीरज पांडेय के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति धार्मिक या राजनीतिक भावनाओं का सहारा लेकर धमकी देता है, तो उस पर आपराधिक धमकी, उकसावा और सार्वजनिक शांति भंग से जुड़ी धाराएं लग सकती हैं। ऐसे मामलों में अदालत देखती है कि बयान का असर डर फैलाने और हिंसा भड़काने वाला है या नहीं। न कि वक्ता की भावना या मंशा का दावा। इस पर सुप्रीम कोर्ट भी कहता है कि संविधान नागरिकों को अपनी बात रखने, विरोध करने और असहमति जताने का अधिकार देता है। लेकिन, यह अधिकार कानून की सीमा के भीतर ही है। जैसे ही कोई बयान धमकी, हिंसा या जान का डर पैदा करने लगे, वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे से बाहर चला जाता है। सवाल: वीडियो या बयान वायरल करने से अपराध और गंभीर हो जाता है? जवाब: विक्रम सिंह के कहते हैं- बिल्कुल, किसी धमकी भरे बयान या वीडियो का वायरल होना अपराध को और गंभीर बना देता है। जब कोई व्यक्ति जान से मारने की धमकी या उकसाने वाला बयान सार्वजनिक मंच, सोशल मीडिया या वीडियो के जरिए देता है, तो उसका असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। समाज में डर और अशांति फैलाने की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस केवल आपराधिक धमकी तक सीमित नहीं रहती। उकसावा, सार्वजनिक शांति भंग और दहशत फैलाने से जुड़ी सख्त धाराएं भी जोड़ सकती है। इसका सीधा असर यह होता है कि मामला गैर-जमानती बन सकता है। आरोपी को राहत मिलना मुश्किल हो जाता है। सवाल: सांसद या राष्ट्रीय नेता को धमकी पर अलग कानून लागू होता है? जवाब: पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के मुताबिक, कानून सबके लिए बराबर है। किसी सांसद, नेता या आम नागरिक किसी को भी धमकी देने के मामलों में जो सजा आम इंसान पर लागू होती है, वही सभी पर लागू होंगे। हालांकि, कानून में एक महत्वपूर्ण फर्क उस स्थिति में आता है, जब कोई व्यक्ति किसी पब्लिक सर्वेंट या उससे जुड़े व्यक्ति को धमकी देकर कोई काम करने के लिए मजबूर करता है। या किसी वैध काम को रोकने या प्रभावित करने की कोशिश करता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… शाह मानहानि केस-राहुल गांधी का आरोपों से इनकार; सुल्तानपुर में मोची के परिवार से मिले करणी सेना के एक कार्यकर्ता ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को गोली मारने की धमकी दी है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने गुरुवार को यह दावा किया। उन्होंने धमकी वाला वीडियो भी सोशल मीडिया X पर शेयर किया है। पवन खेड़ा ने लिखा कि पूरा RSS-भाजपा तंत्र एक ‘गोडसे फैक्ट्री’ है। पढ़िए पूरी खबर…