बैठक में निर्णय लिया गया कि बेसहारा पशुओं को सडक़ से हटाया जाए और जिन पशुओं को पशुपालक द्वारा दूध निकालने के बाद खुला छोड़ा जाता है, उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की जाए। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि टैग लगे पशु की भी पहचान की जाए कि उसका पालक कौन है और फिर पशुपालक को तलब कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशु हादसे का कारण बनते हैं, ऐसे में पशुओं को सडक़ से हटाया जाना जरूरी है। उन्होंने गौशाला व नंदीशाला के संचालकों से कहा कि बेसहारा पशुओं को लेने की पहल करें।
उन्होंने कहा कि बेसहारा पशुओं के प्रबंधन व पुनर्वास के लिए जिला स्तर पर काम किया जा रहा है। हर नागरिक का कर्तव्य बनता है कि सडक़ों पर गौवंश को हटा कर उन्हें गौशाला भेजने में मददगार बनें ताकि इन पशुओं को भी आश्रय मिल सके और सडक़ पर पशुओं की वजह से दुर्घटनाएं न हो पाए। उन्होंने बताया कि सिरसा जिला में पहले भी अभियान चलाकर पशु पकड़े गए हैं, लेकिन अब इस ओर विशेष ध्यान दिया जाना है। उन्होंने कहा कि कोई भी पशु गौशाला में लाया जाता है तो रजिस्टर में उसका पंजीकरण किया जाए।
इस मौके पर गौशालाओं की ओर से पशु चिकित्सकों की कमी व दवाइयों को लेकर मांग रखी गई, जिस पर अतिरिक्त उपायुक्त ने पशुपालन विभाग से इस संबंध में कार्रवाई करने को कहा है। उप निदेशक पशुपालन सुखविंद्र सिंह ने बताया कि जिले में कुल 142 गौशालाएं है, जिनमें से 138 गौशालाएं पंजीकृत है। बैठक में एसडीएम सिरसा राजेंद्र कुमार, एसडीएम ऐलनाबाद पारस भागोरिया, डीडीपीओ बलजीत सिंह, डीआरओ संजय कुमार, ईओ एमसी सुशील कुमार, विभिन्न गौशालाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
