हिसार में जाट शिक्षण संस्था के चुनाव पर अटका पेंच:2020 की वोटर लिस्ट पर आपत्ति, रजिस्ट्रार ने मांगा जवाब, प्रेसवार्ता आज

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हिसार जिले में जाट शिक्षण संस्था के चुनाव एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। 2020 की वोटर लिस्ट को आधार बनाकर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने पर आपत्ति जताई गई है। मामले में जिला रजिस्ट्रार ने चुनाव अधिकारी को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। विवाद सदस्य संख्या, कॉलेज प्रतिनिधियों और वोटिंग अधिकार को लेकर खड़ा हुआ है। इस बीच आज संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने प्रेस कान्फ्रेंस बुलाई है। इसमें चुनाव प्रक्रिया, पारदर्शिता, संगठनात्मक दिशा एवं भविष्य की रणनीति पर जानकारी दी जाएगी। बता दें कि जाट शिक्षण संस्था के चुनाव के लिए तैयार की गई वोटर लिस्ट में 296 सदस्यों और 12 कॉलेजों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। आरोप है कि यह सूची पुरानी (2020) है, जबकि संस्था में इसके बाद कई नए सदस्य जुड़े हैं और कुछ सदस्यों की स्थिति में बदलाव भी हुआ है। ऐसे में पुराने डेटा के आधार पर चुनाव कराना नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है। बता दें कि सेठ छाजूराम ने जाट शिक्षण संस्थान को शुरू किया था। करीब एक महीना पहले चुनाव की घोषणा हुई थी हिसार जिले में जाट एजुकेशन सोसाइटी के चुनावों की घोषणा करीब एक महीने पहले की गई थी। सोसाइटी के प्रधान दिलदार सिंह पूनिया, रिटर्निंग ऑफिसर एडवोकेट प्रदीप सिंह बाजिया और सहायक रिटर्निंग ऑफिसर एडवोकेट अनिल श्योरान ने चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान किया था। आरओ प्रदीप सिंह बाजिया और एआरओ अनिल श्योरान ने बताया था कि जाट एजुकेशन सोसाइटी के चुनाव आगामी 12 अप्रैल को होंगे। 26 और 27 मार्च से नामांकन मांगे गए थे।
संस्था के चार कॉलेज और स्कूल जाट शिक्षण संस्था हिसार के अधीन चार कॉलेज व स्कूल संचालित हैं। संस्था में 14 हजार 605 छात्र व छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। संस्था में 296 कॉलेजियम मेंबर और 12 कॉलेजों के प्रतिनिधियों को मिलाकर 605 वोटर हैं। कॉलेजियम मेंबर बाद में प्रधान व कार्यकारिणी का चुनाव करवाते हैं। संस्था के चुनाव हर तीन बाद होते हैं। संस्था से हिसार के अलावा हांसी, सिरसा, फतेहाबाद, जींद और रोहतक जिलों के सदस्य हैं। एडवोकेट ने लगाई थी याचिका हिसार के एडवोकेट योगेश सिहाग ने वोटर लिस्ट को लेकर जिला रजिस्ट्रार में याचिका डाली थी। एडवोकेट ने कहा था कि 2020 की वोटर लिस्ट के आधार पर चुनाव कराना गलत है। संस्था में नए सदस्य जुड़े हैं, उन्हें वोटिंग अधिकार दिया जाना चाहिए। पुरानी वोटर लिस्ट के आधार पर चुनाव कराने से निष्पक्षता प्रभावित होगी।