मनरेगा निरस्त करने के खिलाफ देशभर में अभियान की जरूरत:CWC की बैठक में खड़गे बोले- SIR लोकतांत्रिक अधिकार कम करने की सुनियोजित साजिश

Spread the love

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को निरस्त किए जाने के खिलाफ देशव्यापी अभियान की जरूरत है। दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में खड़गे ने यह भी कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों को कम करने की सुनियोजित साजिश है। घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करें कि गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट न हटें। खड़गे ने कहा कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के अधिकारों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। मनरेगा की दुनियाभर में तारीफ हुई खड़गे ने कहा कि मनरेगा यूपीए सरकार की एक दूरदर्शी योजना थी, जिसकी सराहना पूरी दुनिया में हुई। इस योजना के प्रभाव के कारण ही इसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बिना किसी अध्ययन, मूल्यांकन या राज्यों और राजनीतिक दलों से परामर्श किए इस कानून को निरस्त कर दिया। उन्होंने तीन कृषि कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे विरोध के बाद सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा था। खड़गे ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की भी निंदा की और कहा कि पूरा देश इसे लेकर चिंतित है। उन्होंने यह भी कहा कि “भाजपा और आरएसएस से जुड़े संगठनों” ने क्रिसमस समारोहों पर किए गए हमलों ने सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाया है और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को धूमिल किया है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में शशि थरूर भी पहुंचे है। इससे पहले वे कांग्रेस की 2 बड़ी मीटिंग में नहीं गए थे। इंदिरा भवन में चल रही मीटिंग में कांग्रेस शासित राज्यों कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटियों (PCC) के अध्यक्ष भी पहुंचे हैं। यह बिहार चुनाव में हार के बाद CWC की पहली बैठक है। मीटिंग के एजेंडे के बारे में कहा गया है कि कांग्रेसी नेता जी राम जी बिल पर सरकार के खिलाफ पार्टी के एक्शन प्लान पर चर्चा करेंगे। मीटिंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… विरोध का एक्शन प्लान बनेगा, कर्नाटक CM बदलने पर चर्चा संभव नहीं कांग्रेस महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 को खत्म करने के खिलाफ सरकार के खिलाफ अपने आंदोलन शुरू करने की रूपरेखा बना सकती है। कर्नाटक मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि नई दिल्ली में CWC की बैठक में नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा नहीं हो सकती है। यह बैठक सिर्फ देश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाने के बारे में है। कानून का विरोध क्यों हो रहा UPA-काल के MGNREGA की जगह लेने वाला विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी है। कांग्रेस ने वाले नए कानून पर आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि यह महात्मा गांधी का अपमान है क्योंकि उनका नाम हटा दिया गया है। नया कानून हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन रोजगार की गारंटी देता है, जिसके वयस्क सदस्य बिना किसी कौशल वाले शारीरिक श्रम के लिए तैयार होते हैं। हालांकि, केंद्रीय योजना के बजाय नया कानून यह प्रावधान करता है कि केंद्र और राज्यों को योजना की फंडिंग 60:40 प्रतिशत के अनुपात में साझा करनी होगी। ————————– ये खबर भी पढ़ें… थरूर कांग्रेस की स्ट्रैटजिक मीटिंग में फिर नहीं पहुंचे थे, कहा था- 90 साल की मां के साथ हूं; SIR पर हुई बैठक से भी दूर थे 30 नवंबर को पार्लियामेंट के विंटर सेशन को लेकर सोनिया गांधी की लीडरशिप में बैठक हुई थी। हालांकि थरूर के ऑफिस ने बताया था कि वह केरल में अपनी 90 साल की मां के साथ थे। यह दूसरा मौका था जब थरूर पार्टी की किसी मीटिंग में नहीं पहुंचे। इससे पहले खराब सेहत का हवाला देकर SIR मुद्दे पर बुलाई गई कांग्रेस की मीटिंग से भी दूर रहे थे। उस दौरान वे पीएम मोदी के इवेंट में शामिल हुए थे, जिसे लेकर बवाल मचा था। पढ़ें पूरी खबर…