जिस पत्नी की हत्या में काटी सजा, वह जिंदा मिली:फरीदाबाद जेल में 6 साल रहा पति, कोर्ट ने हत्या के प्रयास का दोषी माना, रिहा

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फरीदाबाद में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पत्नी की हत्या के आरोप में पति ने करीब छह साल जेल की सजा काट ली, लेकिन बाद में पत्नी जिंदा मिल गई। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी पति को हत्या के प्रयास का दोषी मानते हुए छह साल की सजा सुनाई। चूंकि आरोपी पहले ही छह साल से अधिक समय जेल में बिता चुका था, इसलिए एडिशनल सेशन जज ज्योति लांबा की कोर्ट ने सजा को अंडरगोन मानते हुए 13 हजार रुपए का जुर्माना लगाकर उसे रिहा करने के आदेश दिए। क्या है पूरा मामला नई दिल्ली निवासी मलखान ने सराय ख्वाजा थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने अपनी बेटी सुधा की शादी वर्ष 2005 में गांव जनौली किशनपुर (हाथरस, यूपी) निवासी मुकेश उर्फ मनोज से की थी। दंपती के छह बच्चे हैं। शादी के कुछ समय बाद दोनों फरीदाबाद आकर रहने लगे और दिहाड़ी मजदूरी करने लगे। काम पर निकली, फिर नहीं लौटी सुधा 13 दिसंबर 2019 को सुधा और मुकेश रोज की तरह काम पर निकले थे। शाम को मुकेश अकेला घर लौट आया। बच्चों के पूछने पर उसने बताया कि सुधा मायके गई है। अगले दिन जब बच्चों ने मामा के यहां फोन किया तो पता चला कि सुधा वहां नहीं पहुंची थी। चरित्र पर शक, उस्तरे से रेत दिया गला इसके बाद पिता मलखान ने सराय ख्वाजा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के दौरान सुधा के पति मुकेश को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मुकेश ने कबूल किया कि उसे सुधा के चरित्र पर शक था। उसने 13 दिसंबर 2019 को काम के बहाने उसे साथ ले जाकर गुरुग्राम नहर के किनारे उस्तरे से उसका गला रेत दिया और चुन्नी से गला घोंट दिया। सुधा को मरा समझकर वह मौके से फरार हो गया। शव नहीं मिला, हत्या में भेजा गया जेल मुकेश की निशानदेही पर पुलिस ने उस्तरा और खून से सना गमछा बरामद किया, लेकिन सुधा का शव नहीं मिला। नहर में भी तलाश की गई, मगर कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद पुलिस ने हत्या के आरोप में मुकेश को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया। छह साल बाद सामने आया चौंकाने वाला सच 25 दिसंबर 2025 को विक्रमचंद नामक व्यक्ति थाने पहुंचा और बताया कि उसे एक महिला गंभीर हालत में नहर किनारे मिली थी, जिसे उसने बादशाह खान अस्पताल में भर्ती कराया था। बाद में महिला को सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर महिला की पहचान सुधा के रूप में की। इसके बाद मुकदमे से हत्या की धारा हटाकर हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी गई। फोरेंसिक सबूत बने निर्णायक मामले में फोरेंसिक सबूत अहम साबित हुए। आरोपी से बरामद उस्तरे और गमछे पर लगा खून सुधा के खून से मेल खा गया। अदालत ने मुकेश को दोषी ठहराते हुए छह साल की सजा सुनाई। हालांकि, मुकदमा दर्ज होने के बाद से मुकेश छह साल, एक महीना और पांच दिन जेल में काट चुका था। इसी आधार पर अदालत ने सजा को अंडरगोन मानते हुए 13 हजार रुपए का जुर्माना लगाकर उसकी रिहाई के आदेश दिए।