हुड़का पहाड़ का पारंपरिक वाद्य यंत्र है, जिसकी आवाज पूरे माहौल को उत्साह से भर देती थी. तबले और हारमोनियम के साथ जब बैठकी होली शुरू होती, तो लोग घंटों तक राग-रागिनियों में डूबे रहते. पुरुष और महिलाएं अलग-अलग समूह में होली गाते थे, जबकि खड़ी होली में लोग गोल घेरा बनाकर नाचते थे. गीतों में भगवान, ऋतु परिवर्तन और सामाजिक जीवन की झलक मिलती थी. पुराने समय की होली में खानपान भी आज से काफी अलग था.
पारंपरिक वाद्य यंत्र हुड़का-तबले की थाप पर झूमता था गांव, ऐसी होती थी पहाड़ की पुरानी होली
