बारीगोड़ा में आयोजित तत्व सभा को संबोधित करते हुए सुनील आनंद ने कहा कि परम पुरुष सृष्टि के प्रत्येक मनुष्य के मन में परम चेतन सत्ता के रूप में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य परमात्मा की खोज में इधर-उधर भटकता है, जबकि उसका अपना शरीर ही एक मंदिर है, हृदय उस मंदिर का गर्भगृह है और स्वयं मनुष्य उसका पुजारी।
उन्होंने कहा कि परम पुरुष को जानने के लिए सच्ची भक्ति आवश्यक है, जो किसी भौतिक वस्तु से नहीं मिलती। भक्ति के लिए साधना और कीर्तन ही एकमात्र माध्यम हैं। उन्होंने बाबा नाम केवलम की महिमा बताते हुए कहा कि यह अनन्य भाव का कीर्तन है, जिसमें केवल ईश्वर ही केंद्र में होता है दूसरा कोई नहीं।
सुनील आनंद ने कहा कि जब यह भाव आता है कि मेरे पिता परमपिता परमेश्वर हैं, वही मेरे स्वामी हैं, तब भक्त के जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है। ऐसे भाग्यशाली भक्तों के सभी स्तरों पर समस्याओं का समाधान संभव हो जाता है।
