शहरों के ट्रेंड में ढलते पहाड़ खो रहे अपनी पहचान! बुजुर्ग बोले…सुविधाएं तो बढ़ीं, पर खो गई जड़ों की खुशबू

Spread the love

पहाड़ों की सादगी, शुद्ध खान-पान और आत्मनिर्भरता अब आधुनिकता की भेंट चढ़ती जा रही है. जो गांव कभी ‘तौली’, ‘नाली’ के लिए जाने जाते थे, वे अब बाजार और मोबाइल संस्कृति के जाल में फंस रहे हैं. उत्तराखंड के गांवों में अब लोग घर के अनाज की जगह बाजार के आटे पर निर्भर हैं, जिससे न केवल सेहत बल्कि परंपराएं भी दम तोड़ रही हैं. गांव के बुजुर्गों की जुबानी जानिए, कैसे शहरों के ट्रेंड ने पहाड़ों के सुकून और आत्मनिर्भरता को हाशिए पर धकेल दिया है.