Uttarakhand: पहाड़ी ढलानों पर कभी पत्थर और मिट्टी से बने घर सुकून का वो एहसास हुआ करते थे, जो कड़कड़ाती ठंड में गर्माहट और तपती गर्मियों में ठंडक का अहसास दिलाते थे. लेकिन आधुनिकता में अब ये सुंदर नक्काशीदार लकड़ी के दरवाजे और मजबूत पत्थर की दीवारें इतिहास बनती जा रही हैं. कंक्रीट के जंगलों के बीच पहाड़ों की यह पारंपरिक कला दम तोड़ रही है. पत्थर काटने वाले पुराने कारीगरों के हाथों की कारीगरी अब गुमनाम होती जा रही है. आखिर क्यों हम अपनी उस विरासत को खोते जा रहे हैं जो न केवल भूकंप रोधी थी, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान भी थी. आइए जानते हैं.
पहाड़ों की पहचान! पत्थर-मिट्टी के घरों से दूर होती नई पीढ़ी, कंक्रीट के शोर में कहीं खो न जाए पूर्वजों की कला
