रुद्रनाथ धाम के पुजारी सुनील तिवारी ने बताया कि सुबह चार बजे से भगवान रुद्रनाथ की पूजा शुरू हो गई थी। सभी पूजाएं संपन्न कराने के बाद सुबह छह बजे मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। साढ़े सात बजे भगवान रुद्रनाथ डाेली से यहां से प्रस्थान हुए। डोली पंच गंगा, पितृधार, पनार गुग्याल होते मोली बुग्याल पहुंचेगी। वहां भगवान को राजभोग लगेगा (नए अनाजों का भोग)। वहां से डोली सगर गांव पहुंचेगी। यहां पर भी नए अनाज का भोग लगाया जाएगा।
चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद
