Pahadi Lifestyle: आज के दौर में भले ही हमारे पास ब्रांडेड जूते-चप्पलों की भरमार हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक दौर ऐसा भी था जब पहाड़ों में केले के पेड़ की छाल से चप्पलें बनाई जाती थीं. सीमित संसाधनों और कठिन रास्तों के बीच हमारे पूर्वजों ने कुदरत के साथ तालमेल बिठाकर अपनी जरूरतें पूरी करने का जो अनोखा तरीका निकाला, वह आज की पीढ़ी के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है. बुजुर्ग मोहन सिंह धनिक की जुबानी सुनिए उस दौर की कहानी, जब पहाड़ों में सादगी ही सबसे बड़ी पूंजी थी और केले की चप्पल ही पैरों का सहारा होती थी.
पहाड़ों का वो दौर जब केले के तने से बनाई जाती थी चप्पलें, जिनसे उबड़-खाबड़ रास्तों में भी मिलता था मखमली अहसास
