याचिका में अधिवक्ता निखिल सैनी ने अदालत को बताया कि राइजिंग राजस्थान के तहत फुलेरा में रिसोर्ट निर्माण के लिए निजी पक्षकार ने राज्य सरकार से एमओयू किया था। स्थानीय तहसीलदार ने गत 17 जून को एक रिपोर्ट तैयार कर कहा कि आवंटित की जाने वाली भूमि पहाड़ी भूमि है और नाला भी बहता है। ऐसे में इसे आवंटित नहीं किया जा सकता। याचिका में कहा गया कि इसके कुछ दिन बाद 30 जून को तहसीलदार ने अपनी दूसरी रिपोर्ट में माना कि जमीन को आवंटित किया जा सकता है। वहीं तहसीलदार ने अपनी पूर्व की रिपोर्ट से पहाडी भूमि को लेकर कही बात को भी हटा दिया। याचिका में कहा गया कि पहाडी और नाला भूमि होने के कारण इसे आवंटित नहीं किया जा सकता। स्थानीय ग्राम पंचायत ने भी इसे लेकर कलेक्टर के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्थानीय तहसीलदार को पेश होने के आदेश देते हुए कलेक्टर से इस संबंध में अपना शपथ पत्र पेश करने को कहा है।
तहसीलदार आकर बताए पन्द्रह दिन में कैसे बदल गई रिपोर्ट, कलेक्टर भी पेश करें शपथ पत्र
