बड़ा हादसा होने से टल गया क्योंकि गाड़ी ने दूसरा पलटा नहीं खाआ। पानी में गाड़ी धीरे धीरे नीचे धंसती गई। सवारियों की चीख – पुकार सुन कर स्थानीय लोग खड्ड की ओर भागे व सवारियों को बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गाडी पहले आधी पलटी और धीरे पानी में डूबती गई।
गौरतलब है कि बाखली खड्ड और पडोह डैम झील का पानी रोकने के कारण नवनिर्मित वैकल्पिक सड़क मार्ग पानी में डूब चुका था। फिर भी बड़े पहियों वाले वाहन टीपर -बस आदि निकल रहे थे।यह सड़क मार्ग स्थानीय लोगों व माता बगलामुखी मंदिर कमेटी द्वारा बड़ी मशक्कत के बाद निर्मित किया गया था, क्योंकि नवम्बर माह से मार्च तक पडोह डैम झील का पानी बहुत कम हो जाता है। इसलिए इस वैकल्पिक सड़क मार्ग से वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित की गई थी। बरसात त्रासदी के कारण पडोह सराची सड़क मार्ग बाखली पुल से कुकलाह तक क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिसे निकालने से लाछ की पूरी पहाड़ी धंसने लगी है। इस डर के कारण इस पहाड़ी पर बसे 18-20 घरों को खतरा बना हुआ है। ये लोग बाखली से कुकलाह सड़क पर हुए भूसख्लन को उठाने नहीं दे रहे हैं। इसलिए बाखली पुल के नीचे से गांव वालों ने सड़क निर्माण किया है। अभी 5 दिनों से ही इस सड़क मार्ग पर पर वाहनों की आवाजाही हो रही थी की यह हादसा हो गया।
लोगों की मांग है कि अतिशीघ्र बाखली में वाहन योग्य पुल बनाया जाए। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार ने इस हादसे पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की है मगर उन्होंने साफ कहा कि यह सड़क स्थानीय लोगों ने अपनी सुविधा के लिए अस्थाई रूप से आर पार करने के उद्देश्य से निर्मित की है। इसमें लोकनिर्माण विभाग किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं हैं। जबकि बीबीएमबी की अधिशासी अभियंता चन्द्रमणी शर्मा ने बताया कि हमारे डैहर पावर हाउस की टरबाईन में कोई फाल्ट आ गया है। इसलिए पानी को ब्यास नदी में छोड़ा जा रहा। बाखली तक हमेशा ही झील का पानी भरा रहता है। हादसा का हमें दुःख में मगर इसके लिए लोग स्वयं जिम्मेदार हैं।
