तपोवन की जमीन कभी इतनी उपजाऊ थी कि यहां भारी मात्रा में बासमती और अन्य अनाज की खेती होती थी. स्थानीय किसान साल भर की मेहनत से खेतों को संवारते थे और फसल कटने के बाद पूरे क्षेत्र में खुशबू फैल जाती थी. लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान 70 वर्षीय गोपाल अग्रवाल जिनका जन्म और पालन-पोषण यहीं हुआ बताते है कि तपोवन के खेतों में कभी इतनी पैदावार होती थी कि आसपास के बाजारों तक अनाज सप्लाई किया जाता था.
कभी बासमती की खुशबू से महकता था तपोवन, अब कैफे कल्चर का बन गया हब; पर्यटन ने बदली तस्वीर
