हरियाणा में पंचकूला के मोरनी से यमुनानगर तक 10 हजार खैर के पेड़ों की अवैध कटान का मामला अब एक नया और भावुक मोड़ ले चुका है। इस घोटाले को उजागर करने वाले और फिर सस्पेंड किए गए पंचकूला में तैनात फॉरेस्टर विजय कुमार का 5 मिनट 35 सेकेंड का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में विजय कुमार ने न केवल तस्करों और अधिकारियों की मिलीभगत पर सवाल उठाए हैं, बल्कि वन मंत्री राव नरबीर सिंह पर भी अनदेखी का आरोप लगाया है। विजय ने यह भी कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने जीते-जी हरिद्वार जाकर अपना पिंडदान और क्रियाकर्म कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनके लगाए गए आरोप गलत निकले, तो जिस आरे से पेड़ काटे गए, उसी आरे से उनकी गर्दन काट दी जाए। उन्होंने दावा किया है कि भ्रष्टाचार का यह मामला सिर्फ पंचकूला तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के टेरिटोरियल विंग से वाइल्डलाइफ विंग के पास आई सभी सेंक्चुरी भी तस्करों की भेंट चढ़ गई हैं। वीडियो में फॉरेस्टर के 5 बड़े दावे… 1. यादव होने के बाद भी मंत्री ने पानी तक नहीं पूछा: विजय कुमार ने सीधे वन मंत्री राव नरबीर सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी ही बिरादरी के मंत्री के पास उम्मीद लेकर गए थे, लेकिन वहां उन्हें सम्मान तो दूर, पीने का पानी तक नहीं पूछा गया। उन्होंने जातिगत राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले की सरकारों में अपनी बिरादरी की सुनवाई होती थी, लेकिन यहां ईमानदारी की कोई कद्र नहीं। 2. पिताजी की गर्दन कटने जैसा दर्द: फॉरेस्टर ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पिता भी वन विभाग में माली थे और उन्होंने मेहनत से पौधे लगाए थे। कटे हुए पेड़ों के ठूंठ देखकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने उनके पिता की गर्दन काट दी हो। उन्होंने कहा कि तस्करों ने 50 से 100 साल पुराने जंगल को उजाड़ दिया है। 3. हरिद्वार में पिंडदान और वीआरएस की मांग: विजय कुमार ने कहा कि वह मानसिक रूप से इतने परेशान हैं कि नींद की गोली खाने पर भी सो नहीं पा रहे। उन्होंने हरिद्वार जाकर अपना पिंडदान कर दिया है और विभाग से वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) मांगी है, लेकिन विभाग उन्हें ईमानदारी से काम भी नहीं करने दे रहा और न ही वीआरएस दे रहा है। 4. तस्करों के खिलाफ हथियार उठाने की इच्छा: वीडियो में फॉरेस्टर ने रोष जताते हुए कहा कि तस्कर अगले ही दिन गाड़ियां छुड़ा लेते हैं और कर्मचारी ‘हाथों में चूड़ियां’ पहनकर बैठे रहते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि उन्हें दो बंदूकें और परमिशन दी जाए, वह अकेले जंगल जाकर तस्करों से लड़ेंगे। 5. पूरे प्रदेश के जंगलों की जांच की मांग: विजय ने दावा किया कि भ्रष्टाचार केवल पंचकूला तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि वाइल्ड लाइफ विंग की सभी सेंचुरी तस्करों की भेंट चढ़ गई हैं। उन्होंने मांग की कि कलेसर से लेकर अन्य सभी खैर के जंगलों की गहनता से जांच हो और जंगलों में सीसीटीवी व फेंसिंग की व्यवस्था की जाए। वन मंत्री ने बनाई जांच कमेटी पंचकूला के डिस्ट्रिक्टर फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) विशाल कौशिक ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए वन मंत्री ने एक जांच कमेटी बनाई है। चूंकि ये पूरा मामला वन मंत्री की निगरानी में है, ऐसे में इस मामले में वह इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकते। यहां पढ़िए पूरा मामला क्या है… 26 फरवरी को पेड़ों के खैर के कटे होने का मामला सामने आया था। जब फॉरेस्टर विजय कुमार ने पेड़ों को काटे जाने का वीडियो वन मंत्री राव नरबीर के करीबी को भेजा था। हालांकि इसके बाद ही फॉरेस्टर विजय कुमार को सस्पेंड कर दिया गया था। इस मामले के खुलासे के बाद 3 मार्च को पंचकूला के आसरेवाली क्षेत्र में खैर काटे जाने की मामले की पांच तक जांच चली थी। जांच में ये भी बात सामने आई थी कि खैर के पेड़ों को साइलेंट कटर से रात में काटा गया। इसके बाद 70 के करीब ऊंटों से इस बेशकीमती खैर की लकड़ी की तस्करी की गई। बाद में सबूत मिटाने के लिए पेड़ों के ठूठ जलाने का भी प्रयास किया गया। फॉरेस्टर विजय कुमार ने ये कहा… वन विभाग में ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा खोखला है, क्योंकि तस्कर पकड़े जाने के अगले ही दिन गाड़ियां छुड़ा लेते हैं और ईमानदार कर्मचारियों को वीआरएस (VRS) तक नहीं दिया जा रहा।
सस्पेंडेड फॉरेस्टर बोला- मैंने हरिद्वार जाकर अपना पिंडदान किया,VIDEO:हरियाणा में पेड़ काटने के आरोप झूठे निकले तो गर्दन काट देना, ईमानदारी की कद्र नहीं
