सरगुजा में डिजिटल सर्वे की बड़ी चूक: रकबा ‘शून्य’ होने से किसान परेशान

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सरगुजा में धान खरीदी की प्रक्रिया इस बार किसानों के लिए भारी पड़ रही है। नए सिस्टम और डिजिटल सर्वे की खामियों ने किसानों की जमीन का रकबा रिकॉर्ड से गायब कर दिया है। नतीजा यह कि धान बोने और कटाई पूरी कर लेने के बाद भी कई किसानों को पता चला कि सरकारी पोर्टल पर उनका रकबा ‘शून्य’ यानी जीरो दर्शाया जा रहा है। इसी गंभीर समस्या को लेकर गुरुवार को लखनपुर क्षेत्र के किसान लहपटरा में एकत्र हुए और नेशनल हाईवे को रोकने की तैयारी करने लगे।

किसानों का आरोप है कि सरकारी पोर्टल पर रकबा दर्ज न होने से वे समर्थन मूल्य में धान नहीं बेच पाएंगे, जबकि उन्होंने खेती करने के लिए कर्ज तक ले रखा है। उनका कहना है कि समय निकल जाने पर खरीदी बंद हो जाएगी और उनकी फसल औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी होगी।लहपटरा के किसान रामजतन राम ने बताया कि बीते वर्ष उन्होंने 86 क्विंटल धान बेचा था, लेकिन इस बार पोर्टल पर उनका पूरा रकबा ‘शून्य’ है। समिति में पूछताछ करने पर भी उन्हें यही जवाब मिला कि रकबा अपडेट नहीं हुआ है। उन्होंने आशंका जताई कि जब तक तहसील कार्यालय में सुधार होगा, खरीदी की अवधि खत्म हो जाएगी।

इसी तरह किसान जगदेव राम ने कहा कि इस वर्ष उनके रकबे में भारी कटौती दिख रही है। पिछले साल जहां वह 40 क्विंटल धान बेच चुके हैं, वहीं इस बार पोर्टल पर रकबा कम होने के चलते उन्हें केवल 21 क्विंटल बेचने की अनुमति बताई जा रही है।

डिजिटल सर्वे की गड़बड़ी बनी सिरदर्द

इस वर्ष राज्य सरकार ने धान के रकबे का सर्वे निजी कंपनियों से डिजिटल माध्यम से कराया है। किसानों का कहना है कि इस सर्वे में बड़े पैमाने पर त्रुटियां हुईं। कई किसानों की जमीनें पूरी तरह ‘गायब’ दिख रही हैं, तो कई के रकबे में मनमाने तरीके से कटौती कर दी गई है। इससे ग्रामीण इलाकों में भारी असंतोष फैल गया है। किसानों का कहना है कि सुधार के लिए वे लगातार कृषि केंद्र, समिति और पटवारी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं से भी स्पष्ट समाधान नहीं मिल रहा।

प्रशासन ने दिया आश्वासन

चक्काजाम की खबर मिलते ही लखनपुर के नायब तहसीलदार उमेश तिवारी मौके पर पहुंचे और किसानों से बात की। उन्होंने बताया कि जिन किसानों के एग्री-स्टैक पंजीयन में खसरा नंबर छूट गए हैं, उन्हें पटवारी के माध्यम से सुधारा जाएगा। जिनका रकबा शून्य दिख रहा है, उनसे आवेदन लेकर पुन: सत्यापन कराया जाएगा और जांच के बाद रकबा रिकॉर्ड में जोड़ दिया जाएगा। तिवारी ने यह भी बताया कि डीसीएस के माध्यम से करीब 80 प्रतिशत गांवों में गिरदावरी की गई थी, लेकिन ऑनलाइन एंट्री में तकनीकी गड़बड़ियों के कारण समस्या पैदा हुई है, जिसे ठीक किया जा रहा है।

किसान फिलहाल लौटे, चेतावनी बरकरार

नायब तहसीलदार की समझाइश के बाद किसानों ने चक्काजाम रोक दिया और शांतिपूर्ण तरीके से वापस लौट गए। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यदि समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो वे दोबारा हाईवे जाम करने के लिए मजबूर होंगे।