सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ वायरल वीडियो पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। वीडियो में सीएम को एक खास समुदाय के सदस्यों पर राइफल से निशाना साधते और फायरिंग करते हुए दिखाया गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने पिटीशनर्स से गुवाहाटी हाई कोर्ट जाने को कहा। हालांकि कोर्ट ने कहा कि चुनाव से पहले कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ट्रेंड बन गया है, कोर्ट को प्लेग्राउंड मत बनाइए। असम में आने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि समस्या यह है कि चुनाव का एक हिस्सा उससे पहले लड़ा जाता है। जोकि ठीक नहीं है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट हिमंता के खिलाफ लगाई गई तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। दो याचिकाएं CPI(M) और CPI ने लगाई थीं। तीसरी याचिका असम के चार लोगों ने मिलकर दायर की थीं। कोर्ट रूम LIVE याचिकाकर्ता के वकील सिंघवी: यह मामला संविधान के बुनियादी स्तंभों को प्रभावित करेगा। जैसे शपथ, अनुच्छेद 14 (समानता) और 15 (भेदभाव निषेध)। CJI: क्या यह काम हाईकोर्ट नहीं कर सकता? सिंघवी: अगर ऐसा मामला भी सुप्रीम कोर्ट नहीं सुनेगा तो अनुच्छेद 32 का मतलब क्या रह जाएगा? मैं SIT जांच की मांग कर रहा हूं और 17 मामलों की सूची दे रहा हूं जहां सुप्रीम कोर्ट ने सीधे सुनवाई की है। CJI: जांच टीम के सदस्य असम के बाहर से भी हो सकते हैं। सभी पक्ष संयम और आपसी सम्मान रखें। हर चुनाव के समय सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक मंच बना देना एक गलत ट्रेंड बन रहा है। सिंघवी: हिमंता बार-बार ऐसा करते हैं। CJI: ये सारी दलीलें पहले हाईकोर्ट में रखें। सिंघवी: सुप्रीम कोर्ट के लिए यह आदर्श मामला है संवैधानिक कर्तव्य निभाने का। आपने पहले विनोद दुआ और अर्णब गोस्वामी जैसे मामलों में दखल दिया है। CJI: वे मामले अलग थे, वहां दंडात्मक कार्रवाई हो रही थी। यहां आप किसी के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं। अगर हाईकोर्ट को मानवाधिकार उल्लंघन लगेगा तो वह आदेश दे सकता है। हर मामला सीधे यहां लाना ठीक नहीं, इससे हाईकोर्ट कमजोर होता है। सिंघवी: हर मामले का एक जैसा नियम नहीं हो सकता। कुछ लोगों को सजा हुई पर इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का मामला है, जिसने शपथ ली है। CJI: हाईकोर्ट न जाने का कोई कारण नहीं है। हमारे पास भी लंबित मामलों का बोझ है। हाईकोर्ट को कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। सिंघवी: देश के संवैधानिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है और FIR तक दर्ज नहीं हुई। CJI: जो राहत आप मांग रहे हैं, वही हाईकोर्ट भी दे सकता है बल्कि उससे ज्यादा दे सकता है। सिंघवी: मैं एफआईआर कहां दर्ज कराऊँ? मुझे असम के अलावा किसी और हाईकोर्ट भेज दें। CJI: यह हाईकोर्ट का मनोबल गिराने जैसा है, मैं इसे सख्ती से खारिज करता हूं। अगर हाईकोर्ट से राहत न मिले तो फिर सुप्रीम कोर्ट आएं। सिंघवी: यह पूरे देश का मामला है। CJI: क्या पूरे देश का हर मुकदमा सुप्रीम कोर्ट ही आए? अनुच्छेद 226 हाईकोर्ट की मुख्य शक्ति है और उसे बचाए रखना जरूरी है। सिंघवी: 17 मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई की है, फिर अब क्यों नहीं? CJI: पहले हाईकोर्ट जाएं। यही संवैधानिक व्यवस्था है। न्याय तक पहुंच के लिए अनुच्छेद 226 बहुत महत्वपूर्ण है। सिंघवी: अनुच्छेद 32 में सुप्रीम कोर्ट के पास विवेकाधिकार है। 32 और 226 दोनों समानांतर शक्तियां हैं। एक शपथ लेने वाला पदाधिकारी रोज ऐसे बयान दे रहा है। CJI: हम याचिकाकर्ता को राहत देने की कोशिश करेगे पर यह ‘शॉर्टकट’ सही नहीं। सुप्रीम कोर्ट को खेल का मैदान मत बनाइए। हाईकोर्ट का सम्मान करें, हम उनसे जल्द सुनवाई का अनुरोध करेंगे। कांग्रेस ने सबसे पहले उठाया था वीडियो का मुद्दा दरअसल, 8 जनवरी को कांग्रेस ने दावा किया कि असम बीजेपी X हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया जिसमें असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा मुसलमानों को गोली मारते दिख रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि ये वीडियो अल्पसंख्यकों की टार्गेटेड पॉइंट-ब्लैंक हत्या को बढ़ावा देने जैसा है। कांग्रेस का दावा है कि वीडियो डिलीट कर दिया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के X हैंडल पर दिख रहे वीडियो में नजर आ रहा है कि असम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कथित तौर पर एक राइफल से निशाना साधते और दो लोगों पर गोली चलाते हुए दिख रहे थे। निशाने में दिख रही तस्वीर में एक ने टोपी पहनी थी और दूसरे की दाढ़ी थी। इसका कैप्शन पॉइंट-ब्लैंक शॉट था। श्रीनेत के शेयर किए गए वीडियो में असम की भारतीय जनता पार्टी का X अकाउंट नजर आ रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ने लिखा- यही है असली बीजेपी: सामूहिक हत्यारे। यह जहर, नफरत और हिंसा आप पर है, मिस्टर मोदी। उन्होंने पूछा कि क्या अदालतें और अन्य संस्थाएं सो रही हैं? कांग्रेस महासचिव बोले थे- यह नरसंहार का आह्वान वीडियो वायरल होने के बाद संगठन के प्रभारी कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर बीजेपी की आलोचना की थी। वेणुगोपाल ने X पर कहा था- एक आधिकारिक बीजेपी हैंडल ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें अल्पसंख्यकों की टारगेटेड, पॉइंट-ब्लैंक हत्या दिखाई गई है। उन्होंने कहा कि यह नरसंहार का आह्वान करने के अलावा और कुछ नहीं है। एक ऐसा सपना जिसे यह फासीवादी शासन दशकों से पाले हुए है। हिमंत के मियां मुसलमान बयान पर भी हो चुका है विवाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 27 जनवरी को कहा था कि राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में 4 से 5 लाख मिया मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि हिमंत बिस्व सरमा और भाजपा सीधे तौर पर मिया समुदाय के खिलाफ हैं। उन्होंने लोगों से मिया समुदाय को परेशान करने की अपील की। उनका कहना था कि जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे। मिया बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक अपमानजनक शब्द है। असम सीएम के मुताबिक वे मूल निवासियों के संसाधनों, नौकरियों और जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। तिनसुकिया जिले के डिगबोई में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से सरमा ने कहा वोट चोरी का मतलब यह है कि हम कुछ मिया वोट चुराने की कोशिश कर रहे हैं। आदर्श रूप से उन्हें असम में वोट डालने की अनुमति नहीं होनी चाहिए, बल्कि बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। सीएम ने कहा, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न कर सकें। सरमा ने कहा था- अगर वो 5 रुपए मांगे तो 4 रुपए दो हिमंत बिस्व सरमा ने आगे कहा था कि जो कोई भी किसी भी तरह से मिया को परेशानी दे सकता है, वह दे। आप भी इसमें शामिल हैं। रिक्शा में अगर किराया 5 रुपये है, तो उन्हें 4 रुपये दीजिए। जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे। ———— ये खबर भी पढ़ें… गौरव गोगोई का मामला गृह मंत्रालय भेजेगी असम सरकार:CM हिमंता के आरोप- कांग्रेस सांसद की पत्नी के PAK खुफिया एजेंसी ISI से संबंध असम सरकार कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के पाकिस्तान कनेक्शन मामले को केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजेगी। असम कैबिनेट ने शनिवार को यह फैसला लिया। जिसके बारे में रविवार को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी। असम सरकार कांग्रेस सांसद गौरव की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न का OCI/वीजा रद्द करने की मांग भी करेगी क्योंकि उनकी मौजूदगी भारत के लिए नुकसानदायक है। पूरी खबर पढ़ें…
हिमंता शूटिंग वीडियो मामला, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार:कहा- चुनाव से पहले कोर्ट का दरवाजा खटखटाना ट्रेंड बन गया है, इसे प्लेग्राउंड मत बनाइए
