सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के छह आरोपिताें की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा

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ने दिल्ली दंगों की साजिश रचने के छह आरोपितों की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

उच्चतम न्यायालय में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान ने जमानत याचिका दायर की हैं। दिल्ली पुलिस ने आरोपितों की ओर से दाखिल जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा है कि आरोपितों ने साजिश रची थी कि देश की सत्ता को पलटा जाए और नेपाल और बांग्लादेश की तरह सत्ता के खिलाफ बगावत करना चाहते थे। केंद्र सरकार की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कहा था कि आरोपितों के मन में संविधान के प्रति थोड़ा भी सम्मान नहीं बचा है और वे नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में डंडे, एसिड की बोतलें और आग्नेयास्त्र लेकर चलते थे। राजू ने कहा था कि आरोपितों को केवल इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती कि ट्रायल में देरी हो रही है। उन्होंने कहा था कि ट्रायल में देरी आरोपितों की वजह से हो रही है ना कि अभियोजन पक्ष की वजह से।

आरोपित उमर खालिद के वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि इस मामले में 751 एफआईआर दर्ज की गई हैं, लेकिन उमर खालिद का नाम केवल एक एफआईआर में है। उसमें दिसंबर, 2022 में बरी कर दिया गया। एक दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें साजिश का जिक्र है। सिब्बल ने कहा था कि 750 एफआईआर में उमर खालिद किसी में भी लिप्त नहीं है। 751 एफआईआर में 116 में ट्रायल किया गया, जिसमें 97 में दोषी बरी कर दिए गए। 17 केसों में फर्जी दस्तावेज को आधार बनाया गया है।