चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष शुक्रवार काे यह मामला मेंशन करते हुए एक वकील ने कहा कि गाडलिंग की जमानत याचिका पर 26 अगस्त को सुनवाई हुई थी, जिससे जस्टिस एमएम सुंदरेश ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था। उन्होंने कहा कि इस याचिका पर जल्द सुनवाई की जाए। तब कोर्ट ने इस याचिका पर 3 सितंबर को सुनवाई करने का आदेश दिया। इस दौरान वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि गाडलिंग की जमानत याचिका पर उच्चतम न्यायालय में 11 बार सुनवाई स्थगित हो चुकी है। गाडलिंग पर आरोप है कि उन्होंने दूसरे सह आरोपितों के साथ साजिश रचकर माओवादियों की मदद की। गाडलिंग पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गाडलिंग पर आरोप है कि उन्होंने माओवादियों से सूरजगढ़ खदान के परिचालन का विरोध करने और स्थानीय लोगों को इसमें शामिल करने को कहा था। एक जनवरी, 2018 को भीमा-कोरेगांव की 200वीं सालगिरह पर हुए कार्यक्रम में हिंसा हुई थी। उसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस ने 162 लोगों के खिलाफ 58 केस दर्ज किए हैं।
