कार्यक्रम का आयोजन दून मेडिकल कॉलेज के परिसर में हुआ, जिसमें संघ से जुड़े कई स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विभाग प्रचारक धनंजय ने शाखा के महत्व, हिन्दू समाज के एकीकरण, संगठन के उद्देश्य और समाज सेवा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने संघ के सौ वर्षों की गौरवशाली यात्रा को सेवा, अनुशासन, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और सामाजिक समरसता का प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने समाज को धर्मांतरण और विघटनकारी षड्यंत्रों से सचेत रहने का आह्वान किया व उपेक्षित और वंचित वर्गों की सेवा को सच्चे राष्ट्रधर्म की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के पदचिह्नों पर चलकर ही भारत माता को विश्वगुरु और शांति का प्रतीक बनाया जा सकता है। युद्धकाल, आपदाओं और दुर्घटनाओं के दौरान संघ द्वारा किए गए सेवा कार्यों का उल्लेख कर शाखा एवं संगठन से प्राप्त संस्कारों को बल दिया।
कार्यक्रम में विभिन्न आयु वर्ग के सैकड़ों स्वयंसेवक शामिल हुए। पथ संचलन समाज में अनुशासन, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत साबित होता है। कार्यक्रम में प्रांत सह संपर्क प्रमुख डॉ अभ, महानगर कार्यवाह सतेंद्र, महानगर विद्यार्थी प्रचारक देवराज आदि उपस्थित रहे।
