हरियाणा में हांसी जिले के नारनौंद स्थित कागसर के खुशी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं का कड़कड़ाती ठंड में 5 दिन से धरना जारी है। आज पांचवें दिन छात्राएं 164 के बयान दर्ज करवाने हांसी कोर्ट गई हैं। मंगलवार को भी कुछ छात्राओं के बयान दर्ज हुए थे। बयान में छात्राओं ने बताया कि कॉलेज संचालक उनको माल कहकर बुलाता था। इतना ही नहीं रात को 10 बजे बिना सीधा हॉस्टल के कमरों में घुस जाता था। इतना नहीं लड़कियों के भाई जब उनको लेने आते तो उनको उनका बॉयफ्रेंड बताया था। इस मामले में कई लड़कियों को सैक्सुअल हरासमेंट करने के आरोप लगाए थे। संचालक ने एक लड़की के लिए ‘माल’ शब्द का इस्तेमाल भी किया। वहीं धरने पर बैठी छात्राओं ने बताया कि संचालक पर 28 दिसंबर को एफआईआर दर्ज हो गई थी। तीन दिन बीत जाने के बाद भी उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं खाप पंचायतों की ओर से दिया गया अल्टीमेटम भी आज शाम को खत्म हो रहा है। अगर शाम तक संचालक की गिरफ्तारी नहीं हुई तो नारनौंद में सतरोल खाप बड़ी पंचायत का ऐलान कर सकती है। वहीं छात्राओं ने यहां से माइग्रेशन पीजीआई रोहतक में करवाने की मांग भी की है ताकि यह प्रबंधन भविष्य में उनको टारगेट ना करे। एक छात्रा ने अपने बयान में ये कहा… मैं दिन के समय अपने हॉस्टल के कमरे में जा रही थी उसी समय जगदीश गोस्वामी ने मुझे बुलाया और बोला की आ जा तुझे टैब दिखाता हूं। उस बहाने से उसने मुझे बाथरूम में बुलाकर मुझे कंधे, कमर और स्तनों पर छु कर प्रभाव डालने का प्रयास किया। साथ ही टी-शर्ट हटाकर ब्रा की स्ट्रेप खींचकर खोलने का प्रयास किया। इसके बाद भी वो आता-जाता मुझे छेड़ता था। जैसे कि थप्पड़ मारना, बाल खींचना, कान मरोडना व टच करते रहना। नर्सिंग कॉलेज में 250 छात्राएं, 180 हॉस्टल में हिसार के नारनौंद उपमंडल के गांव कागसर में खुशी नर्सिंग कॉलेज 2007 में खुला था। 2011 से इसमें रेगुलर नर्सिंग की पढ़ाई शुरू हुई। यह कॉलेज जींद से करीब 18 किमी दूर नारनौंद के कागसर में है। इसमें बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, जीएनएम और एएनएम कोर्स करवाए जाते हैं। हिसार के नर्सिंग कॉलेज में 250 छात्राएं पढ़ती हैं। इनमें से करीब 180 छात्राएं हॉस्टल में रहती हैं। इनमें से भी करीब 70 छात्राएं धरने पर हैं। जानिए छात्राओं ने संचालक के बारे में क्या कहा…
हांसी कोर्ट में आज दर्ज होंगे 8 छात्राओं के बयान:नर्सिंग कॉलेज संचालक की 3 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं; लड़कियों को ‘माल’ कहता था
