सपा का बड़ा आरोप, आगरा में बनाए गए फर्जी वोटर:विधान परिषद के आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत

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समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद के आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फर्जी शिक्षक मतदाताओं को शामिल करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में सपा ने मांग की है कि पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। जिन शिक्षक मतदाताओं के फॉर्म-19 (आवेदन पत्र) को जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने प्रतिहस्ताक्षरित नहीं किया, उनके नाम अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाएं। साथ ही फर्जी मतदाता बनाने वाले षड्यंत्रकारियों, निर्वाचन कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव हो सकें। आगरा में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप सपा ने आरोप लगाया है कि अनंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद आपत्ति अवधि जो 2 दिसंबर 2025 से 16 दिसंबर 2025 थी, में अकेले आगरा में 10,389 नए दावे आए, जिनमें से 7,780 स्वीकृत हुए। इससे कुल मतदाता 16,380 हो गए। लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक से 25 फरवरी 2026 को मांगी गई जन सूचना के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने मात्र 1689 फॉर्म-19 का परीक्षण किया और उस पर हस्ताक्षर किए। इससे साफ है कि बाकी हजारों शिक्षक मतदाताओं का सत्यापन DIOS द्वारा नहीं हुआ। सपा का आरोप है कि ये फर्जी तरीके से, निर्वाचन अधिकारियों के साथ मिलकर अंतिम सूची में शामिल किए गए। यहां तक कि कुछ ऐसे शिक्षक भी सूची में हैं, जिनके आवेदन अनंतिम सूची से पहले ही डीआईओएस ने निरस्त कर दिए थे। पार्टी ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि इसी तरह अलीगढ़ और मथुरा जैसे जिलों में भी ऐसी ही गड़बड़ी की आशंका व्यक्त की है। निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों का हवाला ज्ञापन में भारत निर्वाचन आयोग के पत्र 12 सितंबर 2025 और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के 2008 के फैसले का जिक्र करते हुए कहा गया है कि शिक्षक निर्वाचक बनने के लिए फॉर्म-19 को जिला विद्यालय निरीक्षक से अनिवार्य रूप से अटेस्ट होना जरूरी है। सपा ने आरोप लगाया कि पहले भी मंडलायुक्त आगरा को कई शिकायती पत्र दिए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे निर्वाचन आयोग की मंशा के विपरीत फर्जी मतदाता तैयार हो गए, जो निष्पक्ष चुनाव में बड़ी बाधा हैं। ज्ञापन सौंपने वालों में के.के. श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह और राधेश्याम सिंह शामिल थे, जिन्होंने त्वरित कार्रवाई की मांग की।