हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) ने पानीपत के सेक्टर-19 स्थित ‘एस्ट्रम ला रेगेंस’ प्रोजेक्ट में फ्लैट कब्जे में देरी को लेकर बिल्डर के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। अथॉरिटी ने बिल्डर को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता खरीदारों को उनके द्वारा जमा की गई राशि पर कब्जा मिलने तक की देरी के लिए निर्धारित दर से ब्याज का भुगतान करे। हरेरा के इस फैसले के बाद से बिल्डर में हड़कंप में क्या है मामला? पानीपत निवासी चेतना आनंद और सौरभ आनंद ने ‘एस्ट्रम वैल्यू होम्स प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘स्टैंजा डेवलपर्स’ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने साल 2013 में इस प्रोजेक्ट में एक अपार्टमेंट बुक किया था। अपार्टमेंट बायर्स एग्रीमेंट (ABA) के अनुसार, बिल्डर को 42 महीने के भीतर कब्जे की पेशकश करनी थी। बिल्डर की दलीलें और कोर्ट का रुख बिल्डर की ओर से तर्क दिया गया कि प्रोजेक्ट में देरी के पीछे कई बाहरी कारण थे, जिनमें लेबर की कमी और अन्य सरकारी मंजूरियां शामिल थीं। हालांकि, रेरा अथॉरिटी ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि खरीदारों ने अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा बिल्डर को समय पर दिया है, इसलिए वे समय पर कब्जे के हकदार हैं। रेरा अथॉरिटी के मुख्य आदेश खरीदारों के लिए बड़ी राहत अथॉरिटी के चेयरमैन परनीत सिंह सचदेवा और सदस्यों ने स्पष्ट किया कि रियल एस्टेट एक्ट (RERA) का मुख्य उद्देश्य खरीदारों के हितों की रक्षा करना है। यदि बिल्डर अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसे कानूनी रूप से हर्जाना भरना होगा।
पानीपत के ‘एस्ट्रम ला रेगेंस’ के बिल्डर को झटका:HRERA का ऑर्डर- फ्लैट कब्जे में देरी पर खरीदारों को ब्याज सहित भुगतान करें
